यूपी में 105 अधिवक्ता चिन्हित, 35 पर FIR, हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई

 उत्तर प्रदेश में फर्जी लॉ डिग्री के आधार पर वकालत करने के मामले में 105 अधिवक्ता चिन्हित किए गए हैं। अब तक करीब 35 मामलों में FIR दर्ज हो चुकी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच जारी है।
 
 105 अधिवक्ताओं की लॉ डिग्रियां सत्यापन में फर्जी पाए जाने का दावा किया गया है, जबकि अब तक करीब 35 मामलों में FIR दर्ज हो चुकी है।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में फर्जी लॉ डिग्री और दस्तावेजों के आधार पर अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराने के मामलों ने बार काउंसिल और पुलिस की चिंता बढ़ा दी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने ऐसे मामलों में कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक सत्यापन में 105 अधिवक्ताओं की लॉ डिग्री फर्जी पाए जाने की बात सामने आई है, जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

105 अधिवक्ताओं की सूची पुलिस को दी गई

बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव आरके शुक्ला के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में सत्यापन के दौरान फर्जी पाई गई लॉ डिग्रियों के आधार पर पंजीकृत 105 अधिवक्ताओं की सूची तैयार की गई है। इन मामलों में पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
 

हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई

बताया गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में संबंधित मामलों में पारित आदेश के बाद बार काउंसिल को फर्जी पाई गई डिग्रियों के आधार पर पंजीकरण कराने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश मिले थे।

इसी के आधार पर मानकीकृत सत्यापन रिपोर्ट के जरिए ऐसे अधिवक्ताओं की सूची तैयार की गई और पुलिस को उपलब्ध कराई गई।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डिग्रियां भी जांच के घेरे में

बार काउंसिल के अधिकारियों के मुताबिक, चिन्हित मामलों में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जुड़ी बताई गई कुछ लॉ डिग्रियां भी सत्यापन में फर्जी पाई गई हैं। इस पर अधिकारियों ने चिंता जताई है।

बार काउंसिल की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि जांच में किसी संस्थान या विश्वविद्यालय के कर्मचारी की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

अब तक 35 मामलों में FIR

बार काउंसिल सचिव के मुताबिक, करीब 100 मामलों में पुलिस को तहरीर उपलब्ध कराई जा चुकी है। इनमें से सोमवार तक लगभग 35 अधिवक्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

प्रयागराज के DCP सिटी मनीष शांडिल्य के मुताबिक, प्रत्येक मामला अलग होने के कारण अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सभी मामलों में एक साथ मुकदमे दर्ज करना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए पुलिस चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई कर रही है।

हर मामले की अलग होगी जांच

पुलिस के अनुसार, बार काउंसिल से प्राप्त सूची के आधार पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। प्रत्येक मामले की विवेचना अलग-अलग होगी। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर संबंधित आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले भी प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में 12 अधिवक्ताओं के खिलाफ फर्जी लॉ डिग्री के आधार पर पंजीकरण कराने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। पुलिस इन मामलों की भी जांच कर रही है।

सत्यापन अभियान अभी जारी

बार काउंसिल के पदाधिकारियों का कहना है कि फर्जी लॉ डिग्रियों का सत्यापन अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है।

सत्यापन के दौरान भविष्य में भी यदि किसी अधिवक्ता की डिग्री फर्जी पाई जाती है तो हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल 105 चिन्हित मामलों में FIR की प्रक्रिया और जांच जारी है। इस कार्रवाई से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वकालत में प्रवेश करने के मामलों पर सख्ती बढ़ने की उम्मीद है।