खेती करने वालों के लिए जरूरी खबर, दुर्घटना होने पर ऐसे मिलेगी सरकारी सहायता
दुर्घटना में किसान की मौत पर परिवार को राहत, यूपी सरकार की योजना में मिलती है आर्थिक सहायता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना किसानों और उनके परिवारों को दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। योजना के तहत पात्र किसान की दुर्घटना में मृत्यु होने या निर्धारित श्रेणी की दिव्यांगता होने पर अधिकतम पांच लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा सकती है। इसका उद्देश्य दुर्घटना के कारण परिवार के सामने उत्पन्न होने वाले आर्थिक संकट को कम करना है।
इस योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों तक सीमित नहीं है, जिनके नाम कृषि भूमि दर्ज है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, खतौनी में दर्ज खातेदार और सहखातेदार के अलावा कृषि आय पर निर्भर उनके परिवार के पात्र कमाऊ सदस्य भी इसके दायरे में आ सकते हैं। पट्टे पर या बटाई पर जमीन लेकर खेती करने वाले भूमिहीन किसान भी निर्धारित शर्तों के अधीन लाभ प्राप्त कर सकते हैं। दुर्घटना के समय संबंधित किसान की आयु 18 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
किन परिस्थितियों में मिलती है सहायता?
योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु, पूर्ण शारीरिक अक्षमता तथा निर्धारित अंगों या आंखों की क्षति जैसी परिस्थितियों में आर्थिक सहायता का प्रावधान है। दुर्घटना की प्रकृति और दिव्यांगता की श्रेणी के आधार पर सहायता राशि तय होती है। मृत्यु या निर्धारित गंभीर क्षति के मामलों में अधिकतम पांच लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है, जबकि कुछ अन्य श्रेणियों में नियमानुसार कम राशि देय होती है। सहायता के लिए पात्रता और राशि का निर्धारण संबंधित सरकारी नियमों के अनुसार किया जाता है।
कैसे करें आवेदन?
योजना का लाभ लेने के लिए पात्र किसान या मृतक किसान के कानूनी वारिस आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी देखी जा सकती है। इसके अलावा संबंधित तहसील कार्यालय से आवेदन और दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
आवेदन के साथ आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बैंक खाते का विवरण, खतौनी या भूमि संबंधी अभिलेख, दुर्घटना से संबंधित प्रमाणपत्र तथा मृत्यु या दिव्यांगता से जुड़े आवश्यक दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। वास्तविक दस्तावेजों की सूची मामले के अनुसार संबंधित कार्यालय से सत्यापित कर लेनी चाहिए।
समय पर आवेदन करना जरूरी
दुर्घटना के बाद आवेदन करने में देरी से बचना जरूरी है। शासनादेशों में आवेदन की समय-सीमा से संबंधित प्रावधान निर्धारित हैं और कुछ परिस्थितियों में जिलाधिकारी स्तर पर अतिरिक्त समय दिए जाने की व्यवस्था भी रही है। इसलिए आवेदन से पहले वर्तमान समय-सीमा की पुष्टि संबंधित तहसील या जिला प्रशासन से कर लेनी चाहिए।
आवेदन जमा होने के बाद संबंधित अधिकारी दस्तावेजों और पात्रता की जांच करते हैं। जांच पूरी होने और दावा स्वीकृत होने पर नियमानुसार सहायता राशि दी जाती है। किसान या उनके परिजन आवेदन की स्थिति उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के आधिकारिक पोर्टल पर भी देख सकते हैं।