रेयांश को चाहिए जिंदगी का सहारा, महंगे इलाज के लिए परिवार ने लगाई गुहार

 
10 करोड़ के इलाज के इंतजार में मासूम रेयांश, परिवार ने लगाई मदद की गुहार

गोरखपुर। बांसगांव क्षेत्र के दुबौली गांव निवासी आलोक का चार माह का मासूम बेटा रेयांश इन दिनों गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। बच्चे को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 की पुष्टि हुई है। बीमारी के चलते उसकी मांसपेशियां लगातार कमजोर होती जा रही हैं और वह अपने हाथ-पैर तक नहीं उठा पा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, बच्चे को जल्द से जल्द उपचार उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

रविवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान परिजनों ने मासूम के इलाज के लिए समाज के लोगों, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन से आर्थिक सहयोग की अपील की। परिजनों ने बताया कि रेयांश के उपचार के लिए ‘जोल्जेन्स्मा’ (Zolgensma) नामक विशेष इंजेक्शन की आवश्यकता है। इसकी कीमत अमेरिका में करीब 16 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं, एम्स के माध्यम से विशेष अनुरोध किए जाने पर यह उपचार लगभग 10 करोड़ रुपये में उपलब्ध होने की उम्मीद है।

जन्म के बाद दिखने लगे थे बीमारी के लक्षण

रेयांश के पिता आलोक ने बताया कि जन्म के कुछ समय बाद ही बच्चे में असामान्य लक्षण दिखाई देने लगे थे। चिकित्सकीय जांच के बाद SMA टाइप-1 की पुष्टि हुई। बीमारी के कारण बच्चे की शारीरिक क्षमता तेजी से प्रभावित हो रही है। परिवार का कहना है कि समय पर उपचार नहीं मिलने पर उसकी हालत और गंभीर हो सकती है।

इतनी बड़ी रकम जुटाना परिवार के लिए मुश्किल

परिजनों ने बताया कि उपचार की लागत इतनी अधिक है कि अकेले परिवार के लिए इतनी बड़ी धनराशि जुटाना संभव नहीं है। इसी वजह से उन्होंने आम लोगों से आगे आकर सहयोग करने की अपील की है। परिवार का कहना है कि समाज के सामूहिक प्रयास से ही मासूम के इलाज के लिए जरूरी रकम जुटाई जा सकती है।

मुख्यमंत्री और सांसद से भी मदद की गुहार

परिवार ने मुख्यमंत्री के साथ ही बांसगांव सांसद कमलेश पासवान और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी रेयांश के उपचार में सहयोग की अपील की है। परिजनों को उम्मीद है कि शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज के सहयोग से बच्चे को समय पर उपचार मिल सकेगा।

प्रेस वार्ता में मौजूद प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और पत्रकारों ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिक से अधिक लोगों तक परिवार की अपील पहुंचाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से मासूम के इलाज के लिए आवश्यक सहायता जुटाने में मदद मिल सकती है।

क्या है SMA टाइप-1

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका कोशिकाएं प्रभावित होती हैं। SMA टाइप-1 इसका गंभीर रूप माना जाता है और इसमें शिशुओं की मांसपेशियों में कमजोरी तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सकीय उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है।

रेयांश के परिवार की अपील है कि आर्थिक रूप से सक्षम लोग आगे आएं और मासूम के इलाज में यथासंभव सहयोग करें। परिवार के लिए इस समय हर गुजरता पल उम्मीद और चिंता के बीच बीत रहा है।