सहजनवां में राशन की बोरियों के वजन पर उठे सवाल, कम अनाज मिलने की शिकायत
गोरखपुर/सहजनवां। सरकारी राशन वितरण व्यवस्था में खाद्यान्न की मात्रा और गुणवत्ता को लेकर सहजनवां तहसील क्षेत्र में शिकायतें सामने आई हैं। कोटेदारों तक पहुंचने वाली राशन की कुछ बोरियों में निर्धारित वजन से दो से सात किलोग्राम तक कम अनाज मिलने का आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा बोरियों की सिलाई और चावल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतों के बाद खाद्यान्न की आपूर्ति प्रक्रिया की जांच की मांग उठने लगी है।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, राशन की बोरियों के वजन में अंतर मिलने से उचित दर की दुकानों तक पहुंचने वाले खाद्यान्न की मात्रा को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। कुछ बोरियों के साथ रास्ते में छेड़छाड़ किए जाने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जिम्मेदारी तय करने के लिए बोरियों के वजन, सील-सिलाई तथा आपूर्ति से जुड़े अभिलेखों की जांच जरूरी है।
मामले में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदाम से निकलने वाले वाहनों और खाद्यान्न की आपूर्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतों में चावल की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई गई है। ऐसे में गोदाम से लेकर उचित दर की दुकान तक खाद्यान्न के वजन और गुणवत्ता का मिलान कराने की मांग की जा रही है, ताकि अनियमितता की स्थिति में जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।
कोटेदार ने पूर्ति निरीक्षक पर लगाया वसूली का आरोप
इसी मामले के बीच डुमरी गांव के कोटेदार गौरी प्रसाद ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर पूर्ति निरीक्षक सहजनवां पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, दुकान की बहाली के बदले लाखों रुपये की मांग की गई और रुपये देने से इनकार करने पर उनकी दुकान निलंबित कर दी गई। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी का पक्ष भी सामने नहीं आया है।
आपूर्ति व्यवस्था की जांच की मांग
शिकायतों के बाद खाद्यान्न के उठान, परिवहन और वितरण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। मांग की जा रही है कि राशन की बोरियों का मौके पर वजन कराया जाए, सिलाई की स्थिति की जांच हो और गोदाम से उचित दर की दुकानों तक आपूर्ति के रिकॉर्ड का मिलान किया जाए।
यदि निर्धारित मात्रा से कम खाद्यान्न मिलने की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय करना जरूरी होगा। साथ ही कोटेदार की ओर से लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, शिकायतों के आधार पर प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने का इंतजार है।