गीडा के सेक्टर-22 में होटल-स्पा की गतिविधियों पर उठे सवाल, सीईओ ने जांच का दिया भरोसा
गोरखपुर/गीडा। गीडा के पिपरौली चौकी क्षेत्र, विशेषकर सेक्टर-22 में संचालित कुछ होटल, रेस्टोरेंट और स्पा सेंटरों की गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार शिकायतें सामने आने से प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के हवाले से कुछ प्रतिष्ठानों में होटल और स्पा की आड़ में कथित रूप से अनियमित गतिविधियां संचालित किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जाता है कि पूर्व में गीडा प्राधिकरण की ओर से कई होटल संचालकों को नोटिस जारी किए गए थे। कुछ मामलों में कार्रवाई भी की गई थी। इसके बावजूद शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कार्रवाई के बाद कुछ प्रतिष्ठान दोबारा संचालित होने लगे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया था तो कार्रवाई को प्रभावी और स्थायी क्यों नहीं बनाया जा सका।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सेक्टर-22 में पिछले कुछ वर्षों में होटल और अन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी कई शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ मामलों में पुलिस की ओर से छापेमारी और मुकदमे दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। आरोप है कि कार्रवाई के कुछ समय बाद स्थिति फिर सामान्य हो जाती है। इससे स्थानीय स्तर पर पुलिस और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ होटलों में कमरा लेने के बाद अलग-अलग ‘सर्विस’ के नाम पर अतिरिक्त रकम की मांग की जाती है। इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित प्रतिष्ठानों के संचालन, उपभोक्ताओं से वसूली और अन्य नियमों के अनुपालन की भी जांच आवश्यक होगी।
क्षेत्र में समय-समय पर वायरल वीडियो और स्थानीय स्तर पर सामने आने वाले दावों ने भी इन शिकायतों को लेकर चर्चा बढ़ाई है। कुछ लोगों की ओर से कथित संरक्षण और लेनदेन के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, बिना ठोस साक्ष्य किसी अधिकारी, कर्मचारी या व्यक्ति पर भ्रष्टाचार अथवा मिलीभगत का आरोप लगाना उचित नहीं होगा। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
होटल से जुड़े मामलों में पूर्व में पुलिसकर्मी के खिलाफ धनउगाही के आरोपों को लेकर कार्रवाई किए जाने की घटना भी सामने आ चुकी है। ऐसे में क्षेत्र में लगातार शिकायतें सामने आने पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है और क्या पूर्व की कार्रवाई के बाद भी नियमित सत्यापन किया जा रहा है।
हाल के कुछ चर्चित मामलों को भी गीडा क्षेत्र से जोड़कर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हालांकि इन मामलों में वास्तविक तथ्य और गीडा से उनका संबंध जांच का विषय है। ऐसे में किसी भी घटना को आपस में जोड़कर निष्कर्ष निकालने के बजाय पुलिस और प्रशासन की आधिकारिक जांच से स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी होटल या स्पा सेंटर के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं तो केवल छापेमारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए। संबंधित प्रतिष्ठानों के भवन मानचित्र, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, व्यापारिक अनुमति, होटल संचालन की वैधता और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन भी कराया जाना चाहिए। नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई और नियमित निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस मामले में मुख्य कार्यपालक अधिकारी गीडा अनुज मलिक ने कहा कि मामले की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब निगाह इस बात पर है कि शिकायतों और लगाए जा रहे आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ किस स्तर की कार्रवाई की जाती है। फिलहाल मामला आरोपों और शिकायतों के स्तर पर है, जिसकी वास्तविकता निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।