आईटीएम गीडा के छात्रों ने बनाया स्मार्ट वायरलेस तीर, सेंसर तकनीक से होगा रावण दहन

दशहरा पर्व पर सुरक्षा बढ़ाने की पहल, बीटेक द्वितीय वर्ष के आयुष और कृष्णदीप ने सात दिन में तैयार किया प्रोजेक्ट
 

गोरखपुर। इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (आईटीएम), गीडा के बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्रों आयुष और कृष्णदीप ने विज्ञान एवं तकनीक के समन्वय से रावण दहन के लिए स्मार्ट वायरलेस तीर विकसित किया है। सेंसर और वायरलेस सिग्नल पर आधारित इस परियोजना का उद्देश्य दशहरा पर्व के दौरान रावण दहन की प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित बनाने और आग से जुड़ी संभावित दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने की दिशा में प्रयास करना है। छात्रों ने इस नवाचार के माध्यम से पारंपरिक आयोजन में आधुनिक तकनीक के उपयोग की संभावनाएं प्रस्तुत की हैं।

छात्रों के अनुसार, स्मार्ट तीर में वायरलेस तकनीक और दूरी पहचानने वाले सेंसर का इस्तेमाल किया गया है। परियोजना की परिकल्पना के तहत तीर के निर्धारित दूरी तक पहुंचने पर रावण के पुतले में लगा सेंसर वायरलेस सिग्नल को पहचानता है। इसके बाद संबंधित प्रणाली को दहन प्रक्रिया शुरू करने के लिए संकेत मिलता है। इस तकनीक का उद्देश्य पारंपरिक तरीके से सीधे आग लगाने के बजाय एक नियंत्रित प्रणाली के माध्यम से रावण दहन की प्रक्रिया को संचालित करना है।

परियोजना के संबंध में छात्र कृष्णदीप ने बताया कि तीर में सिग्नल भेजने वाला उपकरण लगाया गया है, जबकि पुतले में सेंसर और उससे जुड़ी प्रणाली स्थापित की जाती है। निर्धारित दूरी के भीतर सिग्नल मिलने पर यह प्रणाली सक्रिय होने का संकेत देती है। उन्होंने बताया कि जरूरत के अनुसार वायरलेस सिग्नल की दूरी निर्धारित करने की भी योजना है।

वहीं, छात्र आयुष ने बताया कि दशहरा के दौरान विभिन्न स्थानों पर रावण के पुतलों का दहन किया जाता है। इस दौरान आग, आतिशबाजी और भीड़ के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए दोनों छात्रों ने सेंसर आधारित स्मार्ट तीर तैयार करने का विचार किया। उनके मुताबिक, इस परियोजना का प्रारंभिक परीक्षण चार फुट ऊंचे रावण के पुतले पर किया गया। इसे बड़े पुतलों के लिए उपयोगी बनाने से पहले तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक सुधार किए जाने की जरूरत होगी। छात्रों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में सात दिन लगे।

संस्थान के निदेशक डॉ. एन. के. सिंह ने छात्रों के नवाचार की सराहना की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक आयोजनों से जुड़ी समस्याओं का तकनीकी समाधान तलाशना विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। ऐसे प्रोजेक्ट विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने तथा समाजोपयोगी तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं।

संस्थान के अध्यक्ष नीरज मातनहेलिया, सचिव श्याम बिहारी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष निकुंज मातनहेलिया, संयुक्त सचिव अनुज अग्रवाल और शिक्षकों ने भी छात्रों के प्रयास की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। संस्थान प्रबंधन के अनुसार, विद्यार्थियों में नवाचार की भावना को प्रोत्साहित करना तकनीकी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस तरह की परियोजनाएं समस्या समाधान, टीमवर्क और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में सहायक होती हैं।

हालांकि, इस तकनीक को बड़े सार्वजनिक आयोजनों में इस्तेमाल करने से पहले इसकी विश्वसनीयता, अग्नि सुरक्षा और भीड़ की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का परीक्षण आवश्यक होगा।