गोरखपुर में अधूरा पुल बना मुसीबत, बाढ़ के पानी के बीच जान जोखिम में डाल रहे हजारों ग्रामीण
गोरखपुर। सहजनवा तहसील के पाली ब्लॉक क्षेत्र में पीपीगंज-भक्शा मार्ग पर अधूरा पुल बाढ़ के दौरान ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। पुल निर्माण कार्य पूरा नहीं होने और सड़क पर गहरे पानी के भराव के चलते आसपास के कई गांवों के लोगों को रोजाना जोखिम उठाकर आवागमन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार के कारण बरसात और बाढ़ के मौसम में समस्या और गंभीर हो गई है।
पीपीगंज-भक्शा मार्ग आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता है। इस मार्ग से रोजाना विद्यार्थी, किसान, नौकरी-पेशा लोग और अन्य ग्रामीण आवागमन करते हैं। वर्तमान में बाढ़ का पानी सड़क पर भर जाने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जरूरी काम के लिए निकलने वाले लोगों को गहरे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।
अधूरे पुल के कारण बढ़ा हादसे का खतरा
ग्रामीणों के मुताबिक पुल की स्थिति लंबे समय से खराब थी और इसके निर्माण का कार्य शुरू होने के बावजूद अब तक पूरा नहीं हो सका है। बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद पुल और उसके आसपास के हिस्से में खतरा और बढ़ गया है। पानी की गहराई का सही अंदाजा नहीं होने से राहगीरों के सामने दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य बरसात से पहले पूरा करा दिया जाता तो वर्तमान स्थिति से बचा जा सकता था। उनका आरोप है कि निर्माण में देरी का सीधा असर आम लोगों की आवाजाही पर पड़ रहा है।
ठेकेदार और विभागीय निगरानी पर सवाल
पुल निर्माण की धीमी गति को लेकर ग्रामीणों ने संबंधित ठेकेदार और लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की नियमित निगरानी और समयबद्ध तरीके से काम पूरा कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए थे।
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर पुल निर्माण में देरी क्यों हुई और बरसात से पहले इसे पूरा कराने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की प्रगति की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते की मांग
बाढ़ के बीच लोगों की परेशानी को देखते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि जब तक पुल का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक आवागमन के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को समय रहते सुरक्षा के इंतजाम करने चाहिए। साथ ही अधूरे पुल का निर्माण जल्द पूरा कराया जाना चाहिए, ताकि पीपीगंज-भक्शा मार्ग से जुड़े हजारों लोगों को राहत मिल सके।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर है। सवाल यही है कि अधूरे पुल का निर्माण कब तक पूरा होगा और बाढ़ के बीच जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर लोगों को कब राहत मिलेगी।