गोरखपुर मंडल में 476 करोड़ का लोन, 10,400 आवेदनों को मिली आर्थिक उड़ान

गोरखपुर मंडल में ऋण की बड़ी सौगात, 80 लाभार्थियों को मंच से मिले चेक
 
 युवाओं के सपनों को मिली पूंजी, गोरखपुर मंडल में 476 करोड़ का ऋण बांटा

गोरखपुर। स्वरोजगार, छोटे कारोबार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंगलवार को एनेक्सी सभागार में मंडलीय मेगा क्रेडिट कैंप का आयोजन किया गया। गोरखपुर मंडल के गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज से विभिन्न ऋण योजनाओं के लिए प्राप्त 10,400 आवेदनों में पात्र लाभार्थियों को कुल 476 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। कार्यक्रम में प्रतीकात्मक रूप से 80 लाभार्थियों को चेक प्रदान किए गए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह और विशिष्ट अतिथि महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद मंडलायुक्त ने परिसर में लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विभिन्न स्टॉलों पर बैंकिंग, ऋण और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी प्रदर्शित की गई थी।

पात्र लोगों तक समय से पहुंचे योजनाओं का लाभ

मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। बैंकिंग व्यवस्था आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए बैंक अधिकारियों और संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए पात्र आवेदकों को समय से ऋण उपलब्ध कराना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऋण वितरण को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि लाभार्थी ऋण का सदुपयोग कर अपने कारोबार या स्वरोजगार को आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि बैंक से मिलने वाला ऋण केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का अवसर है। किसी युवा को व्यवसाय शुरू करने के लिए पूंजी मिलने से वह स्वयं रोजगार प्राप्त करने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है।

मंडलायुक्त ने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं, छोटे व्यापारियों, महिलाओं, कारीगरों और स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक लोगों तक ऋण योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाए। पात्र आवेदकों को आवेदन प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी होने पर उसका समाधान प्राथमिकता से कराया जाए।

उन्होंने ऋण वितरण के बाद लाभार्थियों से बैंकिंग संस्थानों का संपर्क बनाए रखने पर भी जोर दिया। लाभार्थियों को ऋण की शर्तों, समय से किस्त जमा करने और ऋण के उचित उपयोग के संबंध में जागरूक करने के निर्देश दिए।

गोरखपुर को 207 करोड़, देवरिया को 144 करोड़

मेगा क्रेडिट कैंप में जनपदवार ऋण वितरण के तहत गोरखपुर में 207 करोड़ रुपये, देवरिया में 144 करोड़ रुपये, कुशीनगर में 82 करोड़ रुपये और महराजगंज में 44 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए।

कार्यक्रम में 80 लाभार्थियों को प्रतीकात्मक रूप से चेक दिए गए। चेक प्राप्त करने वाले लाभार्थियों में स्वरोजगार, व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जुड़े लोग शामिल रहे। लाभार्थियों ने ऋण मिलने पर खुशी जताई और प्रशासन तथा बैंक अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है। बैंक ऋण के माध्यम से युवा अपना रोजगार शुरू करने के साथ ही कारोबार का विस्तार कर सकते हैं। उन्होंने लाभार्थियों से ऋण का निर्धारित उद्देश्य के लिए उपयोग करने और समय से किस्तों का भुगतान करने की अपील की।

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बैंक अधिकारियों ने दी योजनाओं की जानकारी

कार्यक्रम में संस्थागत वित्त विभाग और विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें उप निदेशक जय गोविन्द, पंजाब नेशनल बैंक के मंडल प्रमुख एमके मोहन, महाप्रबंधक मुकुल श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश, कला नन्द रजक, राजीव कुमार चौधरी, बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय प्रबंधक, राजीव विश्वास, केनरा बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक, संतोष कुमार, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक तथा इंडियन बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक शिरोले सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।

बैंक अधिकारियों ने लाभार्थियों को विभिन्न ऋण योजनाओं, बैंकिंग सुविधाओं और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए बैंक और संबंधित विभाग लगातार समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।

मंडलायुक्त ने प्रदर्शनी के विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण करने के साथ लाभार्थियों से भी संवाद किया और ऋण मिलने के बाद उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मंडल के चारों जनपदों में स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने में बैंकिंग क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी पात्र व्यक्ति केवल जानकारी या प्रक्रिया के अभाव में सरकारी योजना के लाभ से वंचित न रहे। ऋण वितरण का उद्देश्य लोगों को आत्मनिर्भर बनाना, रोजगार के अवसर पैदा करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।