AI से ग्रीन हाइड्रोजन तक, आईटीएम गीडा में इंजीनियर्स डे पर भविष्य की तकनीकों पर चर्चा

 इंजीनियरिंग उत्कृष्टता से बनेगा आत्मनिर्भर भारत, आईटीएम गीडा में 59वां इंजीनियर्स डे मनाया
 

सहजनवा, गोरखपुर। द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया (IEI), गोरखपुर लोकल सेंटर एवं इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (आईटीएम), गीडा के संयुक्त तत्वावधान में 59वां इंजीनियर्स डे-2026 हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उत्कृष्टता, सतत विकास, नवाचार और भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व इंजीनियर, सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश ईं. एस.बी.आर. मिश्रा रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रो. वी.के. द्विवेदी, अध्यक्ष, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर, ईं. जे.बी. राय, अध्यक्ष, मालवीय एलुमनी एसोसिएशन, एमएमएमयूटी, ईं. पवन कुमार मिश्रा, पूर्व चेयरमैन, आईईआई गोरखपुर लोकल सेंटर, ईं. नीरज गौतम, राष्ट्रीय महासचिव, एपीजीसीई इंडिया, ईं. सतीश सिंह, चेयरमैन, एपीजीसीई इंडिया गोरखपुर सिटी चैप्टर सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत आईईआई गोरखपुर लोकल सेंटर के चेयरमैन एवं आईटीएम गीडा के निदेशक डॉ. एन.के. सिंह के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि भारत विकास और तकनीकी परिवर्तन के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में इंजीनियरों की भूमिका केवल तकनीकी समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

मुख्य अतिथि ईं. एस.बी.आर. मिश्रा ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना, उद्योग, ऊर्जा, परिवहन, कृषि, स्वास्थ्य, जल प्रबंधन और डिजिटल सेवाओं में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। इन परिवर्तनों को मजबूत, सुरक्षित और दीर्घकालिक बनाने में इंजीनियरिंग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग विकास ऐसा होना चाहिए, जो आर्थिक मजबूती के साथ पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे।

ईं. पवन कुमार मिश्रा ने कहा कि इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का अर्थ केवल नई मशीनों, भवनों अथवा तकनीकों का निर्माण नहीं है। ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार, गुणवत्ता, सुरक्षा और नैतिक जिम्मेदारी के समन्वय से ऐसे तकनीकी समाधान विकसित करना ही वास्तविक इंजीनियरिंग उत्कृष्टता है, जो वर्तमान आवश्यकताओं के साथ भविष्य की चुनौतियों का भी सामना कर सकें। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ड्रोन, 5जी/6जी, सेमीकंडक्टर और डिजिटल ट्विन जैसी उभरती तकनीकों को इंजीनियरिंग के बदलते स्वरूप का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

मुख्य वक्ता प्रो. राकेश कुमार, डीन, कंप्यूटर साइंस विभाग, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने सतत विकास पर जोर देते हुए कहा कि बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिकीकरण के कारण ऊर्जा, जल, भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में इंजीनियरों को ऊर्जा-कुशल भवन, नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट परिवहन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, हरित विनिर्माण और कम-कार्बन तकनीकों के विकास पर ध्यान देना होगा। उन्होंने सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन और सर्कुलर इकोनॉमी को भारत के सतत भविष्य के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।

प्रो. वी.के. द्विवेदी ने तकनीकी संप्रभुता को भारत के भविष्य के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि महत्वपूर्ण और रणनीतिक तकनीकों के लिए देश को बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम करनी होगी। सेमीकंडक्टर, रक्षा तकनीक, साइबर सुरक्षा, संचार प्रणाली, ऊर्जा तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तकनीक और डिजिटल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में इंजीनियरों को तकनीक के उपयोगकर्ता के साथ-साथ निर्माता और नवप्रवर्तक की भूमिका निभानी होगी।

ईं. जे.बी. राय ने शिक्षण संस्थानों, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और युवा इंजीनियरों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ वास्तविक समस्याओं के समाधान, स्टार्टअप, पेटेंट, अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

ईं. नीरज गौतम ने कहा कि भारत के सामने आने वाला समय अवसरों से भरा है। इंजीनियरिंग उत्कृष्टता को नवाचार, आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़कर भारत को उन्नत एवं सतत तकनीकी समाधानों का वैश्विक केंद्र बनाया जा सकता है।

ईं. सतीश सिंह ने कहा कि ‘Engineering Excellence for a Sustainable and Technologically Sovereign India’ केवल एक विषय नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से सक्षम, आर्थिक रूप से मजबूत, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का राष्ट्रीय संकल्प है। इसमें देश के प्रत्येक इंजीनियर की भूमिका महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के अंत में आईईआई गोरखपुर लोकल सेंटर के मानद सचिव ईं. पवनेश कुमार ने सभी अतिथियों, सदस्यों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों को और प्रभावी ढंग से आयोजित करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में आईईआई गोरखपुर लोकल सेंटर के सदस्य, शिक्षाविद, इंजीनियर एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।