आरक्षण सुधार के लिए गोरखपुर में सत्याग्रह, शिक्षा से नौकरी तक बदलाव की उठी मांग
गोरखपुर। आरक्षण व्यवस्था में सुधार और समान अवसर की मांग को लेकर मंगलवार, 8 सितंबर को गोरखपुर टाउन हॉल स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष ‘आरक्षण सुधार सत्याग्रह भारत’ के तत्वावधान में एक दिवसीय शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया गया। सत्याग्रह के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भारत सरकार को भेजने के लिए सौंपा गया।
ज्ञापन में शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान आरक्षण व्यवस्था के स्थान पर संरक्षण आधारित व्यवस्था लागू करने, सरकारी नौकरियों में योग्यता एवं क्षमता को प्राथमिकता देने तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व में ‘वन-टाइम रिजर्वेशन’ अथवा चक्रीय आरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
संगठन ने राष्ट्रीय मानव विकास सूचकांक आयोग के गठन, उच्च शिक्षा संस्थानों में शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के क्रियान्वयन की व्यापक समीक्षा की मांग भी की। इसके अलावा आर्थिक एवं सामाजिक रूप से वंचित प्रतिभाओं को अवसर उपलब्ध कराने, व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और वास्तविक पीड़ितों को प्रभावी संरक्षण देने पर जोर दिया गया।
सत्याग्रह के संयोजक एवं अधिवक्ता राम मूरत उपाध्याय ने कहा कि यह आंदोलन किसी जाति या समुदाय के विरोध में नहीं है। इसका उद्देश्य समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, योग्यता के अनुरूप सम्मान और वास्तविक सामाजिक न्याय की दिशा में व्यवस्था में आवश्यक सुधार की मांग उठाना है।
कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता प्रांजल कुमार दुबे ने किया। इस दौरान देव नाथ उपाध्याय, मनीष सिंह, शंभू यादव, शशांक ओझा, प्रतिष्ठा सिंह, प्रभात पाठक, प्रवीण पाठक, आलोक चौबे, अजय कुमार शुक्ला, आशुतोष कुशवाहा समेत बड़ी संख्या में सत्याग्रही मौजूद रहे।
संगठन की ओर से मांग की गई कि प्रस्तावित सुधारों को लेकर विशेषज्ञों, विधिवेत्ताओं, शिक्षाविदों और संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाए तथा सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुधार की प्रक्रिया शुरू की जाए।