धनतेरस क्यों मनाया जाता है? जानिए इस पर्व का धार्मिक और पौराणिक महत्व

समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि के अमृत कलश के साथ प्रकट होने की मान्यता से जुड़ा है धनतेरस; इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और धन्वंतरि की पूजा के साथ सोना-चांदी खरीदने व यम दीपदान की है विशेष परंपरा।
 

वाराणसी। दीपावली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष महत्व माना जाता है। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन लोग भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही घरों में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस क्यों मनाया जाता है और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है?

 

समुद्र मंथन से जुड़ी है धनतेरस की कहानी

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। मान्यता है कि उनके प्रकट होने के दिन को ही धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। यही कारण है कि इस दिन उनकी पूजा करने से अच्छी सेहत और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है।

 

भगवान धन्वंतरि की पूजा का महत्व

धनतेरस को केवल धन और संपत्ति का पर्व नहीं माना जाता, बल्कि यह अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन का संदेश भी देता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा कर परिवार के सभी सदस्यों के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।

धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा क्यों?

धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन और अन्य नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य लेकर आती हैं। हालांकि, इस परंपरा का अर्थ केवल महंगी चीजें खरीदना नहीं है, बल्कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार शुभ वस्तु घर लाना भी है। इसी दिन लोग धन के देवता भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा भी करते हैं।

यम दीपदान की भी है विशेष परंपरा

धनतेरस के दिन शाम को घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। लोग अपने परिवार की सुख-शांति और लंबी आयु के लिए दीपदान करते हैं।

धनतेरस देता है सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि का संदेश

धनतेरस का पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में धन के साथ-साथ स्वास्थ्य, खुशहाली और परिवार की सुरक्षा भी बेहद जरूरी है। यह त्योहार केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और सकारात्मक जीवन की कामना का प्रतीक है। यही वजह है कि दीपावली से पहले आने वाला धनतेरस हर साल पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।