लोक आस्था के महापर्व छठ की तैयारियां शुरू, जानें चारों दिनों की पूजा और व्रत की पूरी तारीख

काशी में 15 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य, अगली सुबह उगते सूर्य की होगी आराधना
 
काशी में 15 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य, अगली सुबह उगते सूर्य की होगी आराधना

वाराणसी। लोक आस्था, पवित्रता और सूर्य उपासना का महापर्व छठ इस वर्ष 13 नवंबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाले इस चार दिवसीय पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। पूर्वांचल, बिहार और झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ भगवान सूर्य और छठी मईया की आराधना करेंगे। इस दौरान व्रती महिलाएं और पुरुष कठिन नियमों का पालन करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु और खुशहाली की कामना करेंगे।

13 नवंबर को नहाय-खाय से होगी शुरुआत

छठ महापर्व का पहला दिन 13 नवंबर, शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। इस दिन व्रती स्नान-ध्यान कर पूजा का संकल्प लेते हैं। घरों की साफ-सफाई के साथ सात्विक भोजन तैयार किया जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन कद्दू-भात सहित शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। इसी के साथ चार दिवसीय छठ अनुष्ठान की शुरुआत होती है।

14 नवंबर को खरना, शाम को ग्रहण किया जाएगा प्रसाद

पर्व के दूसरे दिन 14 नवंबर, शनिवार को खरना यानी लोहंडा का अनुष्ठान होगा। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को भगवान सूर्य की पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। खरना का प्रसाद मुख्य रूप से गुड़ और चावल से बनी खीर तथा रोटी होता है। इसे पारंपरिक तरीके से स्वच्छता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हुए तैयार किया जाता है। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रतियों का लगभग 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है।

15 नवंबर को डूबते सूर्य को दिया जाएगा पहला अर्घ्य

15 नवंबर, रविवार को छठ महापर्व का मुख्य दिन होगा। कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि पर व्रती नदी, तालाब और सरोवरों के घाटों पर पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित करेंगे। इस दौरान बांस की टोकरी और सूप में ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना तथा अन्य पूजन सामग्री सजाई जाती है। शाम को जल में खड़े होकर भगवान सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य दिया जाएगा। इस अनुष्ठान को संध्या अर्घ्य कहा जाता है।

16 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर होगा व्रत का पारण

छठ महापर्व के अंतिम दिन 16 नवंबर, सोमवार को सुबह उगते सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया जाएगा। इसे उषा अर्घ्य कहा जाता है। सूर्योदय के समय व्रती घाटों पर पहुंचकर भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना करेंगे और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा। इसी के साथ लगभग 36 घंटे से चले आ रहे निर्जला उपवास का समापन होगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा।

देश-विदेश तक फैली छठ महापर्व की आस्था

छठ पर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पूर्वांचल, बिहार और झारखंड में विशेष रूप से देखने को मिलता है। हालांकि, समय के साथ इसकी लोकप्रियता देश के महानगरों और विदेशों तक पहुंच गई है। अब भारतीय समुदाय के लोग विदेशों में भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस पर्व को मनाते हैं। छठ पूजा में स्वच्छता, संयम, प्रकृति और सूर्य के प्रति कृतज्ञता का विशेष संदेश निहित है।

छठ पूजा 2026 की प्रमुख तिथियां:

अनुष्ठान                     तारीख           दिन

नहाय-खाय                13 नवंबर     शुक्रवार

खरना                       14 नवंबर     शनिवार

संध्या अर्घ्य                15 नवंबर     रविवार

उषा अर्घ्य व पारण     16 नवंबर     सोमवार