पितृपक्ष इस बार 14 दिनों का, 2 अक्टूबर को षष्ठी-सप्तमी एक ही दिन

 27 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष, 10 अक्टूबर तक चलेगा श्राद्ध पक्ष, 4 अक्टूबर को होगी मातृ नवमी
 

वाराणसी। पितरों के प्रति श्रद्धा और तर्पण का पर्व पितृपक्ष इस वर्ष 14 दिनों का होगा। पितृपक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से होगी और 10 अक्टूबर तक चलेगा। इस बार षष्ठी और सप्तमी तिथि एक ही दिन पड़ने के कारण पितृपक्ष की अवधि सामान्य से कम रहेगी। पूर्णिमा तिथि को जिनके पिता का निधन हुआ है, उनका श्राद्ध 26 सितंबर को किया जाएगा।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 27 सितंबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृपक्ष का आरंभ होगा। 2 अक्टूबर को षष्ठी और सप्तमी तिथि एक साथ पड़ेंगी। इसी वजह से इस वर्ष श्राद्ध पक्ष की अवधि 14 दिनों की रहेगी।

उन्होंने बताया कि शस्त्र या विष के कारण जिनकी मृत्यु हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। वहीं, यदि किसी की स्वाभाविक मृत्यु चतुर्दशी तिथि को हुई हो तो उनका श्राद्ध द्वादशी तिथि को करने का विधान बताया गया है।

माता की मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध नवमी तिथि को किया जाता है। इसे मातृ नवमी कहा जाता है। इस वर्ष मातृ नवमी 4 अक्टूबर को होगी।

पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालु अपने पितरों की स्मृति में तर्पण, श्राद्ध और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में पितरों के निमित्त किए गए कर्मकांड से उन्हें श्रद्धा अर्पित की जाती है और उनकी शांति की कामना की जाती है।

भारतीय परंपरा में पितृपक्ष का विशेष महत्व माना गया है। यह पर्व परिवारों को अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी स्मृति को संजोने का अवसर देता है। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करते हैं और पितरों के निमित्त भोजन एवं अन्य सामग्री अर्पित करते हैं।

इस बार पितृपक्ष की अवधि कम होने के कारण श्रद्धालुओं को अपनी संबंधित तिथियों के अनुसार श्राद्ध कर्म की तैयारी समय से करनी होगी।