सावन के तीसरे सोमवार पर शिवभक्ति के साथ नागदेव की आराधना
वाराणसी। सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी का पर्व एक साथ पड़ने से सोमवार को काशी में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा शहर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहा। वहीं नागपंचमी के अवसर पर सर्प भय से मुक्ति और नागदेव की कृपा की कामना को लेकर घरों से लेकर मंदिरों तक विशेष पूजा-अर्चना की गई।
जैतपुरा स्थित प्राचीन नागकूप पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। नागदेव के पूजन-अर्चन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, जिससे परिसर के आसपास मेले जैसा माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और सर्प भय से मुक्ति की कामना की।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि सोमवार शाम करीब पांच बजे तक रहेगी, इसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ होगी। सोमवार होने के कारण इस बार नागपंचमी के साथ भगवान शिव की आराधना का विशेष संयोग बना है। पूजा के लिए चित्रा नक्षत्र और शुभ योग का संयोग भी बताया गया है। पंचमी तिथि के दौरान शिववास कैलाश और अग्निवास पृथ्वी पर रहने के कारण शिव पूजन के साथ हवन-पूजन को भी विशेष फलदायी माना गया है।
ज्योतिषविदों के मुताबिक पंचमी तिथि नाग उपासना के लिए विशेष मानी जाती है। चित्रा नक्षत्र 18 अगस्त की सुबह 4:58 बजे तक रहेगा। इसका संबंध रचना, निर्माण, शिल्प, सौंदर्य और कौशल से माना जाता है। वहीं शुभ योग 18 अगस्त की भोर 3:29 बजे तक रहेगा। चंद्रमा सोमवार शाम 4:19 बजे तक कन्या राशि में रहेंगे, इसके बाद तुला राशि में प्रवेश करेंगे। इसी दिन सूर्य के सिंह राशि में प्रवेश करने से सिंह संक्रांति भी होगी।
श्रावण सोमवार के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर बिल्वपत्र अर्पित किए। मंदिरों में महामृत्युंजय मंत्र और पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप भी किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार नागपंचमी और सावन सोमवार का यह संयोग विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
मान्यता है कि नागपंचमी पर विधि-विधान से नागदेव की पूजा करने से परिवार को विषैले जीवों और अनजाने भय से सुरक्षा प्राप्त होती है। इस दिन नवनाग की पूजा का भी विधान बताया गया है। काशी के प्राचीन नागकूप में पूजन-अर्चन को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां नागपंचमी के दिन पूजा करने से कुंडली में बताए गए सर्पदोष के निवारण की कामना पूरी होती है।
सावन सोमवार और नागपंचमी के एक साथ पड़ने से काशी के मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पूरे दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा और बाबा विश्वनाथ की नगरी हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजती रही।