Diwali 2026: नवंबर में इस दिन जगमगाएंगे घर-आंगन, जानें पूजा का मुहूर्त

Diwali 2026: कार्तिक अमावस्या पर मनेगी दिवाली, जानें लक्ष्मी पूजन का शुभ समय
 

Diwali 2026: दीपों का पर्व दीपावली इस वर्ष 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक अमावस्या के अवसर पर मनाए जाने वाले इस पर्व में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। पर्व को लेकर घरों और प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, सजावट तथा खरीदारी की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग के अनुसार, वाराणसी में 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 37 मिनट से रात 7 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इसकी कुल अवधि एक घंटा 57 मिनट है। वहीं, प्रदोष काल शाम 5 बजकर 13 मिनट से रात 7 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालु इस अवधि में अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

कब शुरू होगी अमावस्या तिथि?

पंचांग के अनुसार, दीपावली के दिन अमावस्या तिथि सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। दीपावली पर प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और लग्न की स्थिति के कारण पूजा के मुहूर्त में अंतर हो सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करनी चाहिए।

मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का महत्व

दीपावली पर मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का आरंभ करने वाला देवता माना जाता है। इसी कारण इस दिन दोनों की एक साथ पूजा करने की परंपरा है। कई परिवारों में भगवान कुबेर की भी आराधना की जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की शाम पूजा स्थल की साफ-सफाई कर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसके बाद दीपक जलाकर फूल, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। पूजा के बाद आरती की जाती है और घर के मुख्य द्वार सहित विभिन्न स्थानों पर दीप जलाए जाते हैं।

भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने से जुड़ी है मान्यता

दीपावली को लेकर प्रचलित धार्मिक मान्यता भगवान श्रीराम के 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या लौटने से जुड़ी है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या आगमन पर नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा को दीपोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

दीपावली को अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन लोग घरों को दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाते हैं, रंगोली बनाते हैं तथा परिवार और मित्रों के साथ खुशियां साझा करते हैं। पर्व के दौरान जरूरतमंदों की सहायता करने और आपसी सद्भाव बनाए रखने का भी संदेश दिया जाता है।

दीपावली पर इन बातों का रखें ध्यान

लक्ष्मी पूजन से पहले पूजा स्थल और घर की साफ-सफाई करें। पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें और परिवार की परंपरा के अनुसार मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की आराधना करें। दीपक जलाते समय आग से सुरक्षा का ध्यान रखें। पटाखों का उपयोग करने की स्थिति में निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करें और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दें।

दीपावली केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि परिवार, समाज और रिश्तों में प्रेम तथा सद्भाव बढ़ाने का अवसर भी है। दीपों की रोशनी के साथ यह त्योहार जीवन में सकारात्मकता, खुशहाली और नई शुरुआत का संदेश देता है।

महत्वपूर्ण जानकारी

दीपावली: 8 नवंबर 2026, रविवार

लक्ष्मी पूजन मुहूर्त (वाराणसी): शाम 5:37 बजे से रात 7:34 बजे तक

प्रदोष काल (वाराणसी): शाम 5:13 बजे से रात 7:49 बजे तक

अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे

अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे