क्या लड़के भी मनचाही दुल्हन के लिए रख सकते हैं सावन सोमवार व्रत? जानें धार्मिक मान्यता

सिर्फ लड़कियां ही नहीं, युवक भी रख सकते हैं सावन सोमवार का व्रत, जानें नियम
 
सावन सोमवार व्रत से दूर हो सकती हैं विवाह की बाधाएं, युवकों के लिए भी है विशेष महत्व 

वाराणसी। भगवान शिव के प्रिय सावन मास का शुभारंभ हो चुका है। इस वर्ष सावन का पहला सोमवार 2 अगस्त को पड़ रहा है। सनातन धर्म में सावन मास को भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस पूरे माह श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जहां अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए सावन सोमवार का व्रत रखती हैं, वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अविवाहित युवक भी योग्य जीवनसंगिनी की कामना से यह व्रत रख सकते हैं।

धार्मिक ग्रंथों और शिव पुराण में भगवान शिव एवं माता पार्वती के दांपत्य जीवन को आदर्श माना गया है। इसी कारण विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए शिव-पार्वती की संयुक्त आराधना को विशेष फलदायी माना जाता है।

ऐसे करें शिव-पार्वती का पूजन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत का संकल्प प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद लेना चाहिए। इसके पश्चात शिवलिंग का गंगाजल अथवा शुद्ध जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प, चंदन और अक्षत अर्पित करें। पूजन के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना शुभ माना गया है। साथ ही शिव चालीसा, रुद्राष्टक या शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है। विवाह की इच्छा रखने वाले युवक माता पार्वती का पूजन कर सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मांगें।

व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

धार्मिक नियमों के अनुसार व्रत के दिन सात्विक भोजन करें अथवा अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या निराहार व्रत रखें। क्रोध, असत्य, नशा, तामसिक भोजन और किसी का अपमान करने से बचें। ब्रह्मचर्य का पालन, मन और वाणी की पवित्रता बनाए रखना तथा जरूरतमंदों की सहायता करना भी इस व्रत का महत्वपूर्ण अंग माना गया है।

श्रद्धा और सदाचार से मिलता है शुभ फल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार का व्रत केवल औपचारिक रूप से रखने के बजाय सच्ची श्रद्धा, सदाचार और निष्काम भाव से भगवान शिव की आराधना करने पर अधिक शुभ फल प्राप्त होते हैं। मान्यता है कि शिव-पार्वती की उपासना से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर हो सकती हैं और योग्य जीवनसंगिनी की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। हालांकि, यह विषय धार्मिक आस्था और विश्वास से जुड़ा है तथा इसके फल व्यक्ति की श्रद्धा एवं मान्यता पर आधारित माने जाते हैं।