डूबने के बाद शरीर में क्या होता है? कितनी देर तक बच सकती है जान
डूबने के बाद शरीर में क्या होता है? कितनी देर तक बच सकती है जान, जानिए मेडिकल साइंस क्या कहता है
वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास भारतीय पर्यटकों को लेकर जा रही नाव के हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पानी में डूबने के बाद किसी व्यक्ति के पास बचने के लिए कितना समय होता है। विशेषज्ञों के अनुसार डूबना अक्सर फिल्मों की तरह शोर-शराबे वाला नहीं, बल्कि बेहद शांत और कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित होने वाला हादसा होता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फू क्वोक द्वीप के पास तेज समुद्री लहरों के बीच भारतीय पर्यटकों से भरी नाव पलट गई। नाव में 32 भारतीय सवार थे। हादसे में 15 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि अन्य यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना के बाद डूबने की प्रक्रिया और उससे जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों को लेकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ गई है।
डूबने के दौरान शरीर में क्या होता है?
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति पानी में डूबता है तो सबसे पहले सांस लेने में कठिनाई शुरू होती है। शरीर ऑक्सीजन के लिए संघर्ष करता है और व्यक्ति घबराहट में तेजी से सांस लेने की कोशिश करता है। इसी दौरान पानी श्वसन नली में पहुंच सकता है, जिससे फेफड़ों तक ऑक्सीजन का प्रवाह रुकने लगता है।
ऑक्सीजन की कमी होने पर मस्तिष्क और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होने लगते हैं। यदि समय रहते व्यक्ति को पानी से बाहर निकालकर सांस और हृदय की धड़कन बहाल नहीं की जाए, तो स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है।
कितनी देर तक बच सकती है जान?
विशेषज्ञों के अनुसार, डूबने के बाद पहले 3 से 5 मिनट सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसी दौरान यदि प्रभावी बचाव और सीपीआर (CPR) जैसी प्राथमिक चिकित्सा मिल जाए तो व्यक्ति की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
लगभग 4 से 6 मिनट तक मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने पर स्थायी क्षति शुरू हो सकती है। इसके बाद लंबे समय तक ऑक्सीजन न मिलने पर मृत्यु का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। हालांकि, अत्यधिक ठंडे पानी में कुछ मामलों में शरीर का तापमान तेजी से गिरने के कारण मस्तिष्क की ऑक्सीजन की जरूरत कम हो जाती है और बचाव की संभावना अपेक्षाकृत अधिक समय तक बनी रह सकती है।
समुद्र, नदी और झील में क्या अंतर होता है?
विशेषज्ञ बताते हैं कि समुद्र में तेज लहरें, ज्वार-भाटा और खारे पानी के कारण बचाव कार्य अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। वहीं, नदियों में तेज बहाव और भंवर का खतरा रहता है, जबकि झीलों या तालाबों में पानी अपेक्षाकृत शांत हो सकता है। हालांकि किसी भी जलाशय में डूबना जानलेवा हो सकता है और तत्काल रेस्क्यू सबसे अहम होता है।
डूबने के समय क्यों नहीं सुनाई देती चीख?
रेस्क्यू विशेषज्ञों के अनुसार, डूबता हुआ व्यक्ति अपनी ऊर्जा सांस लेने और पानी से ऊपर रहने में खर्च करता है। ऐसे में वह अक्सर मदद के लिए जोर से चिल्ला नहीं पाता। यही वजह है कि अधिकांश डूबने की घटनाएं बेहद खामोशी से घटित होती हैं।
बचाव के लिए क्या करें?
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डूबते व्यक्ति को जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से पानी से बाहर निकालें।
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यदि व्यक्ति सांस नहीं ले रहा हो तो प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा तुरंत CPR शुरू करें।
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बिना देरी किए आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं।
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तेज बहाव या समुद्री लहरों में बिना सुरक्षा उपकरण के बचाव का प्रयास न करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि डूबने की घटनाओं में शुरुआती कुछ मिनट ही सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर रेस्क्यू और सही प्राथमिक उपचार कई मामलों में जीवन बचा सकता है।