कभी गर्मी, कभी ठंडक… मौसम के उतार-चढ़ाव में ऐसे रखें सेहत का ख्याल
मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश और एलर्जी जैसी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित नींद और साफ-सफाई पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
तापमान में उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो सकती है सेहत
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में दिन और रात के तापमान में अंतर महसूस होने के साथ मौसम में बदलाव का असर लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ सकता है। सुबह-शाम ठंडक और दिन में गर्मी के कारण कुछ लोगों को सर्दी-जुकाम, खांसी, थकान और एलर्जी की समस्या हो सकती है। धूल, धुआं और परागकण भी संवेदनशील लोगों की परेशानी बढ़ा सकते हैं। ऐसे में लापरवाही करने के बजाय रोजमर्रा की आदतों में जरूरी बदलाव करना बेहतर है।
मौसम के अनुसार पहनें कपड़े, खानपान में शामिल करें पौष्टिक चीजें
मौसम में बदलाव के दौरान शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है। भोजन में हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। संतरा, अमरूद जैसे फल विटामिन-सी के अच्छे स्रोत हैं। इसके साथ ही दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें। मौसम ठंडा होने पर प्यास कम लग सकती है, लेकिन शरीर में पानी की कमी न होने देना जरूरी है।
सुबह और शाम के समय तापमान कम होने पर हल्के गर्म कपड़े पहनें। दिन में गर्मी महसूस होने पर कपड़ों की अतिरिक्त परत हटाई जा सकती है। नियमित दिनचर्या बनाए रखना, पर्याप्त नींद लेना और शारीरिक सक्रियता पर ध्यान देना भी सेहत के लिए फायदेमंद है।
साफ-सफाई और एलर्जी से बचाव पर दें ध्यान
बदलते मौसम में व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। बाहर से आने के बाद हाथ धोएं और साफ पानी का सेवन करें। बारिश के बाद आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि ठहरे हुए पानी में मच्छर पनप सकते हैं। इससे मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
जिन लोगों को धूल, धुएं या परागकणों से एलर्जी होती है, उन्हें ऐसे वातावरण से बचने का प्रयास करना चाहिए। सर्दी-जुकाम या बुखार होने पर पर्याप्त आराम करें और दूसरों में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सावधानी बरतें। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी की जरूरत
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा सहित सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को मौसम में बदलाव के दौरान अधिक सतर्क रहना चाहिए। इन लोगों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
यदि लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो समय पर चिकित्सकीय सलाह लें। सामान्य सावधानियां अपनाकर मौसमी बीमारियों के जोखिम को कम करने और दैनिक जीवन को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है।