तैयारी तेज! प्लास्टिक करेंसी की ओर भारत का कदम, 200 करोड़ नोटों का होगा ट्रायल

₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल शुरू, आरबीआई परखेगा मजबूती
 
पॉलीमर नोटों की एंट्री से पहले बड़ा ट्रायल, अलग-अलग मौसम में होगी जांच

नई दिल्ली। भारत में पॉलीमर (प्लास्टिक) करेंसी नोट लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है। सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इन नोटों को फिलहाल पूरे देश में लागू नहीं किया जाएगा। पहले चरण में आरबीआई ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोटों का चुनिंदा शहरों में फील्ड ट्रायल करेगा।

आरबीआई के अनुसार, ट्रायल के लिए शहरों का चयन रैंडम तरीके से नहीं किया जाता। ऐसे शहर चुने जाते हैं जो देश की अलग-अलग भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों का प्रतिनिधित्व करते हों। इससे यह परखा जा सके कि पॉलीमर नोट अत्यधिक गर्मी, नमी, बारिश, धूल, उमस और लगातार उपयोग जैसी परिस्थितियों में कितने टिकाऊ साबित होते हैं। पहले भी जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर, मैसूर और कोच्चि जैसे शहर परीक्षण के लिए चुने जा चुके हैं।

पायलट परियोजना के तहत ₹10 और ₹20 के 100-100 करोड़ नोट जारी किए जाएंगे। इनकी छपाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (बीआरबीएनएमपीएल) करेगी। आरबीआई ने कम मूल्यवर्ग के नोट इसलिए चुने हैं क्योंकि इनका दैनिक लेन-देन में सबसे अधिक उपयोग होता है और ये सबसे जल्दी खराब होते हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आरबीआई हर वर्ष लगभग 2000 से 2400 करोड़ खराब नोट नष्ट करता है, जिनमें बड़ी संख्या कम मूल्यवर्ग के नोटों की होती है। माना जाता है कि पॉलीमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में ढाई से चार गुना अधिक समय तक चल सकते हैं।

हालांकि, पॉलीमर नोटों की शुरुआती छपाई की लागत कागजी नोटों की तुलना में 30 से 60 प्रतिशत अधिक हो सकती है। इनके व्यापक उपयोग के लिए एटीएम, कैश सॉर्टिंग मशीन और वेंडिंग मशीनों में तकनीकी बदलाव भी करने होंगे। इसके अलावा, पॉलीमर नोटों के पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) के लिए विशेष औद्योगिक व्यवस्था की आवश्यकता होगी।

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि पॉलीमर नोट लागू होने के बाद भी वर्तमान कागजी नोट वैध रहेंगे और दोनों प्रकार की करेंसी एक साथ चलन में बनी रहेगी। फील्ड ट्रायल के नतीजों के आधार पर ही भविष्य में इनके व्यापक उपयोग पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।