भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स को नई दिशा, ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर

उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की पहल, 30 से अधिक शहरों में हुईं 400 से ज्यादा बैठकें
 

ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारत द्वारा चौथी बार समूह की अध्यक्षता करना देश की बढ़ती वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक महत्व को दर्शाने वाला अहम अवसर है। पिछले दो दशकों में ब्रिक्स प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग, नीतिगत समन्वय और वैश्विक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। वर्तमान में 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं इस समूह के माध्यम से वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, समावेशी विकास और साझा हितों से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ा रही हैं।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण’ रही। इस दृष्टिकोण के तहत विकासशील देशों की प्राथमिकताओं और ग्लोबल साउथ के हितों को वैश्विक विमर्श में प्रमुखता देने पर विशेष जोर दिया गया। भारत ने ब्रिक्स को केवल सरकारों और राजनयिकों तक सीमित रखने के बजाय आम नागरिकों, किसानों, उद्यमियों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया।

देश के 30 से अधिक शहरों में ब्रिक्स के विभिन्न प्रतिनिधि समूहों की 400 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों के माध्यम से आर्थिक सहयोग, नवाचार, सतत विकास और साझा वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श को व्यापक आधार मिला। भारत की पहल ने ‘जन-केंद्रित विकास’ और ‘मानवता प्रथम’ की अवधारणा को अपनी कार्यशैली में शामिल करने का संदेश दिया।

भारत की अगुआई में ब्रिक्स का यह नया अध्याय न केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों को भी गति देता है। यह पहल भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका, जन-केंद्रित विकास दृष्टि और राष्ट्र निर्माण की यात्रा को वैश्विक मंच से जोड़ने में सार्थक भूमिका निभा सकती है।