Independence Day 2026 : स्वतंत्रता का सच्चा अर्थ- युवाओं की कलम से देशभक्ति की भावपूर्ण रचना
देश की मिट्टी आज़ाद थी,
देश की हवा स्वच्छंद थी,
नदियाँ अपने सुर में बहती थीं,
पर्वतों की चोटियाँ
मुक्त खड़ी रहती थीं।
फिर भी हम गुलाम थे,
अपना ही वतन पराधीन था,
मिट्टी में उगता अनाज पराधीन था,
हवाओं में घुलती खुशबू पराधीन थी,
नदियों में तैरता जीवन पराधीन था,
पर्वतों में छिपा हर खनिज पराधीन था।
आजादी की कीमत जिन्होंने चुकाई,
उन्होंने आजादी की हवा नहीं महसूस की,
मुक्त मिट्टी का अनाज नहीं चखा,
उन्होंने तो अपना लहू बहाकर
इस वतन की नींव सींची।
हमने उनके बलिदान को भुला दिया,
उनके दर्द को समझ न पाए,
जिनके कारण आज हम आज़ाद हैं,
उनके नाम भी जुबां पर
कई बार ला न पाए।
जब तक उनके बलिदानों के आगे
हम सच्चे मन से नतमस्तक नहीं होंगे,
जब तक उनके सपनों का मान रखकर
देश के प्रति अपना कर्तव्य नहीं निभाएँगे,
तब तक आजादी की असली कीमत
हम समझ नहीं पाएँगे,
और न ही स्वतंत्रता दिवस का
सच्चा अर्थ जान पाएँगे।
आओ इस आजादी के पर्व पर
एक संकल्प फिर दोहराएँ,
देश के लिए जिएँ,
देश के लिए कुछ कर जाएँ,
और वीर शहीदों के सपनों का
भारत मिलकर बनाएँ।
जय हिंद!