समुद्र के नीचे दौड़ेगा डेटा, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मजबूत होगा डिजिटल संपर्क
नई दिल्ली। भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए समुद्र के नीचे लगभग 3,600 किलोमीटर लंबी नई सबमरीन केबल प्रणाली विकसित की जा रही है। आई-2एसईए (I-2SEA) नाम की इस परियोजना के जरिए भारत को सिंगापुर और मलेशिया से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य इंटरनेट डेटा के तेज और भरोसेमंद आदान-प्रदान के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और बड़े डेटा सेंटरों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करना है। इस केबल प्रणाली के 2029 की चौथी तिमाही तक चालू होने का लक्ष्य रखा गया है।
माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियां परियोजना में शामिल
इस परियोजना के निर्माण में लाइटस्टॉर्म के साथ माइक्रोसॉफ्ट, सिंगटेल और टाटा कम्युनिकेशंस शामिल हैं। जापान की एनईसी कॉरपोरेशन केबल प्रणाली की आपूर्ति करेगी, जबकि एशियन केबलशिप समुद्र में केबल बिछाने का काम संभालेगी। यह नेटवर्क भारत के पूर्वी तट को दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख डिजिटल और डेटा सेंटर केंद्रों से जोड़ेगा।
आंध्र प्रदेश और चेन्नई में होंगे केबल लैंडिंग स्टेशन
प्रस्तावित नेटवर्क के तहत भारत में आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम और दक्षिण चेन्नई में केबल लैंडिंग स्टेशन बनाए जाने की योजना है। इनके माध्यम से भारतीय डेटा सेंटरों को सिंगापुर और मलेशिया के डिजिटल नेटवर्क से सीधा संपर्क मिलेगा। इससे डेटा ट्रांसफर में लगने वाला समय कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी सेवाओं के लिए जरूरी उच्च क्षमता वाली कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
इंटरनेट सेवाओं को मिलेगा वैकल्पिक रास्ता
दुनिया का बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों के जरिए इंटरनेट से जुड़ा है। इन केबलों में किसी तरह की खराबी या क्षति होने पर अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है। ऐसे में भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच नया केबल नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी के विस्तार और नेटवर्क की मजबूती में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, इससे इंटरनेट बाधित होने की आशंका पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।
AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
भारत में डेटा सेंटर, क्लाउड सेवाओं और AI तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में उच्च क्षमता वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जरूरत भी बढ़ रही है। नई केबल प्रणाली से कंपनियों को बड़े पैमाने पर डेटा भेजने और प्राप्त करने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा मिलने की उम्मीद है। इससे भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच डिजिटल कारोबार तथा तकनीकी सहयोग को भी गति मिल सकती है।
निष्कर्ष: आई-2एसईए परियोजना भारत की अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके चालू होने के बाद AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटरों के लिए अधिक सक्षम नेटवर्क उपलब्ध होने की उम्मीद है।