भीषण बाढ़ से असम बेहाल, मदद के इंतजार में राहत शिविरों में हजारों परिवार
गुवाहाटी। असम के कई जिलों में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी को गहरे संकट में डाल दिया है। खट पाथर क्षेत्र के नामटियाल दारिकापार गांव समेत कई इलाकों में अचानक बढ़े जलस्तर ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। देखते ही देखते घर, मवेशी, अनाज और वर्षों की मेहनत से जुटाई गई संपत्ति पानी में समा गई। अब प्रभावित परिवार राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे बनाए गए अस्थायी राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।
लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद बाढ़ का पानी तेजी से गांवों में घुस गया। ग्रामीणों ने घरेलू सामान को ऊंचे स्थानों पर पहुंचाकर बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के आगे उनके प्रयास नाकाम साबित हुए। कई परिवारों को अपने घर और मवेशियों को छोड़कर जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा।
ग्रामीणों के अनुसार, कई लोग करीब आठ घंटे तक छाती तक भरे पानी में फंसे रहे। बाद में एक स्थानीय युवक ने अपनी जान जोखिम में डालकर नाव के माध्यम से बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। उसकी सूझबूझ और साहस के कारण कई परिवारों की जान बच सकी।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, कपड़े और दवाइयों का गंभीर संकट बना हुआ है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के सामने सबसे अधिक कठिनाई है, क्योंकि आवश्यक दवाइयों और स्वास्थ्य सुविधाओं तक उनकी पहुंच नहीं हो पा रही है।
आपदा की मार झेल रहे लोगों की कहानियां बेहद मार्मिक हैं। एक बुजुर्ग को पूरी रात अपने घर के अनाज भंडार (कोठार) के ऊपर बैठकर गुजारनी पड़ी, क्योंकि चारों ओर बाढ़ का पानी भर गया था। अगले दिन ग्रामीणों ने नाव की मदद से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।
एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि सिर्फ एक से डेढ़ घंटे के भीतर पूरा घर जलमग्न हो गया। उन्होंने कहा, "हम अपना कोई सामान नहीं बचा सके। हमारी पांच गायें और 12 बकरियां थीं, जिनमें से 10 की मौत हो गई। हमारे 18 कुत्ते भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गए।"
एक अन्य पीड़ित ने बताया कि घर के भीतर कमर तक पानी भर जाने से पूरा सामान और बिस्तर खराब हो गया है। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह से वह ठीक से सो भी नहीं पाए हैं।
इस बीच, 27 जुलाई को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इस वर्ष आई बाढ़ सामान्य मानसूनी बाढ़ से अलग और कहीं अधिक विनाशकारी रही। उन्होंने बताया कि राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से 400 प्रतिशत से अधिक वर्षा दर्ज की गई, जिसके कारण उन क्षेत्रों में भी जलभराव और भारी नुकसान हुआ जो सामान्यतः बाढ़ प्रभावित नहीं माने जाते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार जलभराव केवल नदियों के उफान के कारण नहीं हुआ, बल्कि कम समय में हुई अत्यधिक वर्षा ने गांवों और शहरी क्षेत्रों को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया। उन्होंने राहत एवं पुनर्वास कार्यों को तेज करने तथा प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।