4 साल की बच्ची से रेप और हत्या : SC ने आदेश को स्पष्ट किया
उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने हाल ही में 19 अप्रैल, 2022 के अपने एक फैसले को स्पष्ट किया, जिसमें चार साल की बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के दोषी को दी गई मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था।
कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध के लिए दी गई मौत की सजा को आजीवन कारावास के रूप में बदल दिया था।
उच्चतम न्यायालय (Supreme Court): ने हाल ही में 19 अप्रैल, 2022 के अपने एक फैसले को स्पष्ट किया, जिसमें चार साल की बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के दोषी को दी गई मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था।
कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध के लिए दी गई मौत की सजा को आजीवन कारावास के रूप में बदल दिया था।
कोर्ट ने आदेश में आगे कहा था कि धारा 376 ए आईपीसी (बलात्कार पीड़िता की मौत के लिए सजा) के तहत अपराध के लिए लगाई गई शेष जीवन के लिए आजीवन कारावास की सजा को 20 साल के लिए आजीवन कारावास के रूप में संशोधित किया जाएगा।
जबकि दोषी को आईपीसी की धारा 376(2)(i) (16 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्कार), धारा 376(2)(m) (बलात्कार करते समय महिला के जीवन को खतरे में डालना), पोक्सो अधिनियम की धारा 5 (i) (बच्चे को गंभीर चोट पहुंचाने वाला पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट) और धारा 5 (m) (12 वर्ष से कम उम्र की लड़की पर पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट) के तहत सजा सुनाई गई थी। इन अपराधों में शेष जीवन के लिए आजीवन कारावास की सजा भी होती है।
जबकि 19.04.2022 के फैसले में, उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने केवल स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि धारा 376A आईपीसी के तहत दी गई सजा को 20 साल के लिए आजीवन कारावास में बदल दिया जाएगा।
दोषी ने एक स्पष्टीकरण की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया कि अन्य धाराओं - आईपीसी की धारा 376(2)(i), 376(2)(m) और पोक्सो कानून की 5(i) और 5(m) के लिए सुनाई गई सजा को- 20 साल की अवधि के लिए आजीवन कारावास के रूप में भी कम किया जाता है।
पीठ ने आवेदन को पुनर्विचार याचिका के रूप में माना क्योंकि उसने आरोपी पर लगाई गई सजा पर पुनर्विचार की मांग की थी। इन सभी 'अन्य अपराधों' के मामले में, निचली अदालतों ने उसके प्राकृतिक जीवन के शेष भाग के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
खंडपीठ ने फैसले में कहा कि उसने प्रतिशोधात्मक और पुनर्स्थापनात्मक न्याय के पैमाने को संतुलित करने के प्रयास के लिए धारा 376 ए आईपीसी के तहत कम सजा देने का एक सचेत निर्णय लिया था।
कोर्ट ने कहा कि यदि सेशन कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा दी है और हाईकोर्ट ने सजा की पुष्टि की गई है, यह कोर्ट भी धारा 376 (2) (i) और 376 (2) (m), आईपीसी के तहत अपराध के लिए पुष्टि करेगा
और पोक्सो एक्ट की धारा 6 सहपठित धारा 5 (i) और 5 (m) के तहत अपराध के लिए भी सजा की पुष्टि करेगा,
तो आजीवन कारावास का मतलब याचिकाकर्ता (मूल अपीलकर्ता) के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास होगा,
और उस मामले में आईपीसी की धारा 376 (ए) के तहत अपराध के लिए याचिकाकर्ता के जीवन के शेष जीवन के लिए आजीवन कारावास की सजा नहीं देने में अदालत का उद्देश्य विफल होगा।
बेंच ने सजा को इस सीमा तक संशोधित किया कि आरोपी को आईपीसी की धारा 376(2)(i) और 376(2)(m) के तहत अपराध के लिए 20 साल की अवधि के लिए कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी, और पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के साथ पठित धारा 5 (i) और 5 (m) के तहत अपराध के लिए 20 साल की सजा भुगतनी होगी।
19 अप्रैल 2022 के आदेश के अनुसार, उसे धारा 302 आईपीसी के तहत दंडनीय अपराध के लिए आजीवन कारावास और धारा 376 ए, आईपीसी के तहत अपराध के लिए बीस साल की अवधि से गुजरना पड़ता है। सजा साथ-साथ चलती है।
इसलिए असल में दोषी को हत्या के अपराध के लिए आजीवन कारावास और अन्य बलात्कार के अपराधों के लिए 20 साल के लिए आजीवन कारावास की सजा भुगतनी पड़ती है।
चूंकि मामले में "बाकी जीवन तक" शर्त लागू नहीं की गई है इसलिए दोषी 20 साल के बाद सजा में छूट पाने का पात्र होगा। गौरतलब है कि जुलाई, 2022 में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने चार साल के बच्चे की मां द्वारा आरोपी की मौत की सजा को कम करने के अपने आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए दायर एक याचिका को खारिज कर दिया था।
अदालत ने कहा कि संबंधित कारकों पर ध्यान देने के बाद उसके द्वारा कम्यूटेशन किया गया था।
केस : मो फिरोज बनाम एमपी राज्य।