हार्ट अटैक का खतरा कम करने में मददगार हो सकती हैं ये मछलियां, जानिए सेवन का सही तरीका
दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए संतुलित खानपान बेहद जरूरी है। रोजमर्रा की डाइट में शामिल कुछ खाद्य पदार्थ हृदय को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में मछली भी एक महत्वपूर्ण आहार है। खासतौर पर वसायुक्त मछलियों में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड हृदय के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। हालांकि, मछली का सेवन करने से हार्ट अटैक का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता।
ओमेगा-3 से भरपूर होती हैं ये मछलियां
सैल्मन, बांगड़ा और सार्डिन ऐसी मछलियां हैं, जिनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इनमें मौजूद ईपीए (EPA) और डीएचए (DHA) शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व हैं। ये रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स यानी एक प्रकार की वसा का स्तर कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, ओमेगा-3 शरीर में सूजन और हृदय की सामान्य कार्यप्रणाली से जुड़े कई पहलुओं में भूमिका निभाता है।
सैल्मन और बांगड़ा मछली के फायदे
सैल्मन और बांगड़ा मछली में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इन मछलियों को संतुलित आहार का हिस्सा बनाने से शरीर को प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। वहीं, बांगड़ा जैसी मछली भारतीय बाजारों में भी उपलब्ध रहती है, जिससे इसे भोजन में शामिल करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
सार्डिन भी है अच्छा विकल्प
सार्डिन छोटी और वसायुक्त मछली है। इसमें ओमेगा-3 के साथ प्रोटीन और विटामिन बी12 भी पाया जाता है। ये पोषक तत्व शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए जरूरी हैं। मछली के अधिकतम पोषण लाभ के लिए इसे डीप फ्राई करने के बजाय ग्रिल करके, भाप में पकाकर या कम तेल में तैयार करना बेहतर माना जाता है। अधिक नमक और अतिरिक्त वसा के इस्तेमाल से भी बचना चाहिए।
सप्ताह में कितनी बार खाएं मछली?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, हृदय के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सप्ताह में दो बार मछली का सेवन करना उपयोगी हो सकता है। एक बार में लगभग 85 ग्राम पकी हुई मछली को एक सर्विंग के रूप में लिया जा सकता है। मछली का चुनाव करते समय उसमें पारे (मरकरी) की मात्रा पर भी ध्यान देना चाहिए। कम पारे वाली मछलियों को प्राथमिकता देना बेहतर है।
केवल खानपान से नहीं टलेगा हार्ट अटैक का खतरा
हृदय को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ मछली खाना पर्याप्त नहीं है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और वजन नियंत्रित रखना भी जरूरी है। इसके साथ ही रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की नियमित जांच करानी चाहिए। धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाना भी हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
जिन लोगों को पहले से हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें खानपान में बड़े बदलाव करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। मछली को हृदय के अनुकूल आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन इसे किसी दवा या चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं समझना चाहिए।