LIC से SBI MF तक की नजर जियो IPO पर, निवेशकों में बढ़ी हलचल

 मुकेश अंबानी की जियो का बड़ा दांव, IPO से जुटाए जाएंगे हजारों करोड़
 
LIC, SBI म्यूचुअल फंड और HDFC म्यूचुअल फंड समेत कई संस्थागत निवेशकों ने दिखाई दिलचस्पी, ₹30,213 करोड़ जुटाने की तैयारी

नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज के डिजिटल कारोबार से जुड़ी कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) निवेश बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस इश्यू में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), SBI म्यूचुअल फंड और HDFC म्यूचुअल फंड जैसे प्रमुख घरेलू संस्थागत निवेशकों के साथ कई अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने भी दिलचस्पी दिखाई है। कंपनी का आईपीओ 21 अक्टूबर 2026 को खुलेगा और 23 अक्टूबर तक निवेशक इसमें आवेदन कर सकेंगे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों के बीच काफी उत्साह है। निवेशकों की इस दिलचस्पी में प्रमुख म्यूचुअल फंड कंपनियों, बीमा संस्थानों और वैश्विक निवेश प्रबंधकों की भागीदारी शामिल है। हालांकि, निवेशकों की रुचि और वास्तविक शेयर आवंटन अलग-अलग हो सकते हैं।

₹30,213 करोड़ जुटाने का लक्ष्य

जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के जरिए करीब ₹30,213 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। कंपनी ने शेयरों का मूल्य दायरा ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर निर्धारित किया है। इस इश्यू में करीब 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाने हैं। प्रस्तावित आकार के आधार पर यह भारतीय शेयर बाजार के बड़े आईपीओ में शामिल होगा।

वैश्विक निवेशकों की भी दिलचस्पी

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में घरेलू संस्थानों के साथ ब्लैक रॉक, फिडेलिटी और कैपिटल ग्रुप जैसे वैश्विक निवेशकों के भी रुचि दिखाने की खबरें हैं। इसके अलावा कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन वेल्थ फंड भी इस इश्यू में हिस्सेदारी पाने के इच्छुक बताए जा रहे हैं। संस्थागत निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी से इस आईपीओ को लेकर बाजार की निगाहें और तेज हो गई हैं।

टेलीकॉम से डिजिटल सेवाओं तक फैला कारोबार

जियो प्लेटफॉर्म्स का कारोबार मोबाइल कनेक्टिविटी, ब्रॉडबैंड, डिजिटल मनोरंजन, क्लाउड और उद्यमों के लिए तकनीकी सेवाओं तक फैला है। कंपनी की डिजिटल सेवाओं और दूरसंचार क्षेत्र में मजबूत मौजूदगी इसे निवेशकों के लिए चर्चा का प्रमुख केंद्र बनाती है।

निवेश से पहले किन बातों पर दें ध्यान?

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी आईपीओ में बड़े संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे मुनाफे की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, मूल्यांकन, भविष्य की कारोबारी संभावनाओं और जोखिमों का आकलन करने के बाद ही फैसला लेना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है।