सोने की कीमतों में गिरावट के बाद भी बाजार में सुस्ती, क्या अभी और गिरेगा भाव?
नई दिल्ली। सोने की कीमतों में पिछले कुछ समय से जारी गिरावट के बावजूद देश के बड़े ज्वेलर्स फिलहाल खरीदारी को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं। दिवाली और शादी-विवाह के सीजन में आमतौर पर सोने की मांग बढ़ जाती है, लेकिन इस बार कीमतों में और गिरावट की आशंका के चलते बड़ी ज्वेलरी कंपनियां बाजार से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं, छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारी सीमित मात्रा में सोने की खरीदारी कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में करीब 24 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। जनवरी 2026 में सोना 5,400 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंचकर रिकॉर्ड स्तर पर था, लेकिन बाद में कीमतों में लगातार कमजोरी देखने को मिली। पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव जुलाई के बाद पहली बार 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे चला गया।
MMTC-PAMP इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी समित गुहा के मुताबिक, देश की बड़ी ज्वेलरी चेन अभी तक पूरी तरह से खरीदारी के लिए बाजार में नहीं लौटी हैं। उन्हें आशंका है कि सोने की कीमतों में अभी और गिरावट आ सकती है। इसके विपरीत छोटे और मध्यम आकार के ज्वेलर्स खरीदारी कर रहे हैं। इनमें कुछ कारोबारियों ने दोबारा ऑर्डर भी दिए हैं।
आयात शुल्क बढ़ने से भी मांग पर असर
भारत में सोने की मांग कमजोर रहने के पीछे आयात शुल्क में बढ़ोतरी भी एक प्रमुख वजह मानी जा रही है। मई में सरकार ने सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है। ऐसे में आयात शुल्क बढ़ने से सोने की लागत पर दबाव पड़ा है। इसके अलावा घरेलू बाजार में कमजोर मांग और आर्थिक परिस्थितियों ने भी कारोबार को प्रभावित किया है।
सोने के आयात में आ सकती है बड़ी गिरावट
सिटी रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान भारत में सोने का आयात करीब 106 टन रह सकता है। यह चौथी तिमाही के ऐतिहासिक औसत 212 टन की तुलना में लगभग आधा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर मांग और आयात से जुड़े कड़े नियम भी इसकी प्रमुख वजह बताए जा रहे हैं।
छोटे सिक्कों और गोल्ड बार की मांग बरकरार
MMTC-PAMP के मुताबिक, कंपनी की सोने की बिक्री पिछले साल की तुलना में कमजोर रही है। हालांकि, बाजार में छोटे आकार के सोने के सिक्कों और गोल्ड बार की मांग बनी हुई है। सितंबर में बिक्री लगभग पिछले साल के बराबर रही, जबकि अक्टूबर में खरीदारी में कुछ सुधार देखने को मिला है।
क्या आगे और सस्ता होगा सोना?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में और गिरावट आती है तो घरेलू बाजार में भी सोना सस्ता हो सकता है। हालांकि, कीमतों में सुधार शुरू होने पर ज्वेलर्स की खरीदारी बढ़ सकती है। ऐसे में दिवाली और आगामी शादी-विवाह के सीजन में सोने का बाजार किस दिशा में जाता है, इस पर कारोबारियों और ग्राहकों दोनों की नजर बनी हुई है।