एक-दो नहीं, 70 से ज्यादा पेपर लीक... फिर भी ढीठ बनी परीक्षा प्रणाली!
70 से ज्यादा पेपर लीक, 1.7 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित! परीक्षा प्रणाली पर फिर उठे सवाल...
नई दिल्ली। देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक चर्चाओं के अनुसार, पिछले सात वर्षों में देश के अलग-अलग राज्यों में 70 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे लगभग 1.7 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए। इन घटनाओं के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) समेत परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
हाल के वर्षों में NEET-UG और UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया। NEET-UG 2024 परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों और UGC-NET 2024 परीक्षा को रद्द किए जाने के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों ने निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग तेज कर दी।
रिपोर्टों के अनुसार राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में भर्ती परीक्षाओं, बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कई मामलों में परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जबकि लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा का इंतजार करना पड़ा।
उत्तर प्रदेश में भी बीते वर्षों में UPTET, PET, बोर्ड परीक्षाओं और पुलिस भर्ती जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले चर्चा में रहे। वहीं 2024 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा रद्द होने से लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा का इंतजार करना पड़ा।
इस मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं सरकार का कहना है कि पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और इस दिशा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 लागू किया गया है। इस कानून के तहत पेपर लीक और संगठित परीक्षा अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर दंड और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
पिछले 12 साल के बड़े पेपर लीक मामले (2014–2026)
- 2014 – CPMT (कंबाइंड प्री-मेडिकल टेस्ट)
- 2015 – AIPMT पेपर लीक
- 2016 – UPPSC की दो परीक्षाएं रद्द
- 2017 – महाराष्ट्र HSC परीक्षा
- 2018 – CBSE और गुजरात पुलिस भर्ती
- 2019 – रेलवे भर्ती और ओडिशा बोर्ड
- 2020 – कर्नाटक और यूपी बोर्ड
- 2021 – UPTET, MHADA और NEET विवाद
- 2022 – राजस्थान, BPSC और OSSC
- 2023 – तेलंगाना SSC, असिस्टेंट इंजीनियर और असम HSLC
- 2024 – UP पुलिस कांस्टेबल भर्ती, UPPSC RO/ARO, UGC-NET और NEET-UG
- 2025 – UKSSSC, बोर्ड परीक्षा
- 2026 – महाराष्ट्र TET पेपर लीक, NEET-UG 2026
6 साल में 92 छात्रों ने गंवाई जान, हर साल बढ़ते गए आत्महत्या के मामले
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 में ऐसे 4 मामले सामने आए। इसके बाद 2022 में यह संख्या बढ़कर 9 हो गई। वर्ष 2023 में 14 छात्रों ने अपनी जान गंवाई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 19 तक पहुंच गया। सबसे अधिक मामले वर्ष 2025 में दर्ज किए गए, जब 32 छात्रों की मौत की खबरें सामने आईं। वर्ष 2026 में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। शुरुआती महीनों में ही करीब 14 छात्रों के आत्महत्या करने की जानकारी सामने आई है। इनमें कई मामले परीक्षा स्थगित या रद्द होने की खबरों के बाद मानसिक तनाव से जुड़े बताए गए।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बिहार में सबसे अधिक मामले दर्ज हुए हैं। कुल मामलों का लगभग 19.8 प्रतिशत हिस्सा बिहार से जुड़ा बताया गया है। इसके बाद राजस्थान का स्थान है, जहां कोटा और सीकर जैसे बड़े कोचिंग केंद्र स्थित हैं। राजस्थान का हिस्सा करीब 18.7 प्रतिशत बताया गया है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में लगभग 15.4-15.4 प्रतिशत मामले दर्ज हुए हैं, जबकि मध्य प्रदेश का हिस्सा करीब 8.8 प्रतिशत बताया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पेपर लीक के मामलों में कई बार संगठित गिरोह, आर्थिक लेन-देन, तकनीक और सोशल मीडिया का दुरुपयोग सामने आता है। कई जांचों में सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और प्रिंटिंग से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आने के दावे किए गए हैं।
वही बार-बार परीक्षा रद्द होने से छात्रों का समय, आर्थिक संसाधन और मानसिक संतुलन प्रभावित होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों लगाने वाले लाखों युवाओं के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ जाती है। ऐसे में पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता माना जा रहा है।