CJP Protest: सरकार दो मांगों पर सकारात्मक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर मांगा कल दोपहर तक का समय

 CJP और केंद्र सरकार के बीच अहम बैठक पूरी हुई। CJP ने दावा किया कि सरकार दो मांगों पर सकारात्मक है, जबकि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कल दोपहर तक का समय मांगा गया है। पढ़ें पूरी खबर।
 

नई दिल्ली। देशभर में जारी छात्र आंदोलन और पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रतिनिधिमंडल के बीच अहम बैठक संपन्न हुई।

बैठक के बाद CJP ने दावा किया कि सरकार उनकी तीन प्रमुख मांगों में से दो पर सकारात्मक रुख दिखा रही है, जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर निर्णय के लिए कल दोपहर तक का समय मांगा गया है।

बैठक को छात्र आंदोलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर मांगों पर चर्चा करते नजर आए।

10 मिनट चली मंत्रियों से बातचीत

CJP के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रंका ने मीडिया से बातचीत में बताया कि केंद्रीय मंत्रियों के साथ करीब 10 मिनट तक बैठक हुई। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी तीन मांगों में से दो पर सकारात्मक संकेत दिए हैं।

उनके अनुसार, सरकार पीड़ित छात्रों के परिजनों को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के मुद्दे पर भी सकारात्मक रुख सामने आया है।

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर फैसला बाकी

CJP का कहना है कि उनकी तीसरी और सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी है। इस विषय पर भी बैठक में चर्चा हुई, लेकिन सरकार ने अंतिम निर्णय के लिए अगले दिन दोपहर तक का समय मांगा है।

प्रवक्ताओं ने कहा कि सरकार की ओर से इस मांग पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया है।

आगे की रणनीति पर नजर

बैठक समाप्त होने के बाद CJP ने संकेत दिए हैं कि सरकार के जवाब के आधार पर आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि प्रमुख मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो संगठन आगे भी आंदोलन जारी रखने पर विचार कर सकता है।

वहीं, सरकार की कोशिश है कि बातचीत के माध्यम से विवाद का समाधान निकाला जाए और छात्रों के बीच भरोसा बहाल किया जाए।

क्या निकल पाएगा समाधान?

अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि मुआवजे, एफआईआर और अन्य मांगों पर ठोस निर्णय सामने आता है, तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। वहीं धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार का फैसला इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम बिंदु माना जा रहा है।