8 साल की योगिनी वान्या शर्मा को भारत-पेरू से अंतरराष्ट्रीय संयुक्त मानद डॉक्टरेट, रचा नया कीर्तिमान

 

नई दिल्ली। महज 8 वर्ष की आयु में योग के क्षेत्र में अपनी असाधारण प्रतिभा से पहचान बना चुकी बाल योगिनी वान्या शर्मा ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज कराई है। योग, कला, शिक्षा, मानवता और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें भारत और पेरू से संयुक्त रूप से जारी अंतरराष्ट्रीय मानद डॉक्टरेट (Joint Honorary Doctorate in Arts and Humanities) से सम्मानित किया गया है।

यह प्रतिष्ठित सम्मान Nirooja Green India Pariwar Foundation (NGIPF) तथा World Federation of Arts, Literature, Education, Peace and Culture (FEMALPC) की ओर से प्रदान किया गया। सम्मान पत्र में वान्या के योग, संस्कृति, शिक्षा और मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार में दिए गए योगदान की सराहना करते हुए उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रेरणादायी बाल प्रतिभा बताया गया है।

ग्रीन इंडिया परिवार फाउंडेशन के CEO डॉ. नीरज गुप्ता ने कहा कि वान्या शर्मा भारतीय योग और संस्कृति की सशक्त पहचान बनकर उभर रही हैं। उनका समर्पण और अनुशासन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है तथा उनकी उपलब्धियां भारत की बेटियों का गौरव बढ़ा रही हैं।

नई दिल्ली के पीतमपुरा स्थित एस.डी. पब्लिक स्कूल में कक्षा 3 की छात्रा वान्या शर्मा अब तक 18 विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा चुकी हैं। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर योग प्रदर्शन और प्रशिक्षण देकर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं तथा कम उम्र में ही अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

इस सम्मान की विशेषता यह है कि इसका आधिकारिक प्रमाणपत्र भारत और पेरू से संयुक्त रूप से जारी किया गया है, जो वान्या के कार्यों को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता को दर्शाता है।

सम्मान मिलने पर वान्या शर्मा ने इसे अपने माता-पिता, गुरुओं और शुभचिंतकों को समर्पित करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य योग के माध्यम से भारतीय संस्कृति और योग की महत्ता को पूरी दुनिया तक पहुंचाना है।

कम उम्र में मिली यह अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि वान्या शर्मा की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का प्रमाण है। उनकी सफलता देशभर के बच्चों के लिए प्रेरणा बनकर यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से छोटी उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।