80वें स्वतंत्रता दिवस पर विशेष: विकसित भारत की ओर बढ़ता देश, औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की नई यात्रा
नई दिल्ली। भारत इस वर्ष अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। 15 अगस्त 1947 को देश ने अंग्रेजी शासन से आजादी प्राप्त की थी, लेकिन एक सशक्त, आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की यात्रा निरंतर जारी रही। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी सांस्कृतिक पहचान और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
बीते वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा कई ऐसे निर्णय लिए गए, जिन्हें भारत की ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रीय अस्मिता को मजबूत करने वाला माना गया। इनमें नए संसद भवन का निर्माण, राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करना, इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की स्थापना, नए आपराधिक कानूनों का लागू होना, भारतीय नौसेना के नए ध्वज को अपनाना, रेल बजट को आम बजट में शामिल करना, ब्रिटिश शासनकाल में प्रतिबंधित साहित्य के पुनर्प्रकाशन की पहल तथा बजट प्रस्तुति में पारंपरिक 'बही-खाता' का उपयोग जैसे कई कदम शामिल हैं।
इन पहलों को भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान को नई दिशा देने वाले प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से देश के विकास, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के संकल्प को लेकर दिए जाने वाले संदेश भी इसी सोच को आगे बढ़ाते हैं।
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करते हुए विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को दोहराया जाएगा।
स्वतंत्रता दिवस केवल आजादी का उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, लोकतांत्रिक मूल्यों और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का भी प्रतीक है।