Gold Scheme: घर में पड़े सोने पर मिलेगा ब्याज! सरकार की नई योजना में ज्वेलर्स की होगी अहम भूमिका

सोना घर में रखने के बजाय कमाई कराएगा! सरकार की नई योजना में मिल सकता है ब्याज
 
 घर में रखा सोना बनेगा निवेश! नई सरकारी स्कीम में ज्वेलर के जरिए जमा होगा गोल्ड

नई दिल्ली। घर में रखे गहने, सोने के सिक्के और गोल्ड बार अब कमाई का जरिया बन सकते हैं। केंद्र सरकार ऐसी नई गोल्ड स्कीम पर काम कर रही है, जिसके तहत लोगों को घर या लॉकर में रखे फिजिकल गोल्ड को ज्वेलर्स के माध्यम से जमा करने की सुविधा मिल सकती है। इसके बदले जमा सोने के मूल्य के आधार पर ब्याज देने का प्रस्ताव है। हालांकि, अभी योजना का अंतिम ढांचा तैयार नहीं हुआ है और सरकार की ओर से इसका आधिकारिक ऐलान भी नहीं किया गया है।

ज्वेलर के पास जमा कराया जा सकेगा सोना

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्राहक अपने भरोसेमंद नजदीकी ज्वेलर के पास जाकर सोना जमा कर सकेंगे। बाजार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जमा किए गए सोने का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में रखा जा सकता है और निवेशक को सोने की कीमत के आधार पर ब्याज मिलने की व्यवस्था हो सकती है।

सरकार और ज्वेलरी उद्योग के बीच इस योजना को लेकर बातचीत जारी है। माना जा रहा है कि ज्वेलर्स इस पूरी व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसका उद्देश्य उन गहनों और सोने को आर्थिक गतिविधियों में लाना है, जो लंबे समय से घरों और लॉकरों में निष्क्रिय पड़े हैं।

घरों में है बड़ी मात्रा में सोना

भारत में परिवारों के पास बड़ी मात्रा में सोना मौजूद है। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि भारतीय घरों में 20,000 टन से अधिक सोना रखा हो सकता है। यदि इस सोने का एक छोटा हिस्सा भी औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में आता है तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है।

इससे एक ओर घरेलू स्तर पर निवेश के लिए अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध हो सकती है, वहीं दूसरी ओर सोने के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।

2015 की गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम से कितनी अलग होगी नई योजना?

सरकार ने वर्ष 2015 में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) शुरू की थी। इसके तहत लोगों को अपना सोना बैंक या निर्धारित कलेक्शन और टेस्टिंग सेंटर पर जमा करना होता था। हालांकि, योजना को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 तक इस योजना के तहत करीब 38 टन सोना ही जमा हुआ था।

नई प्रस्तावित योजना में सबसे बड़ा बदलाव ज्वेलर्स की भूमिका को लेकर हो सकता है। सरकार और उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि ग्राहक बैंक या टेस्टिंग सेंटर की तुलना में अपने परिचित ज्वेलर के पास सोना जमा कराने में ज्यादा सहज महसूस कर सकते हैं।

नई व्यवस्था में गहनों के अलावा सोने के सिक्कों और गोल्ड बार को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

ज्वेलर्स को मिल सकता है इंसेंटिव

योजना को सफल बनाने के लिए ज्वेलर्स को प्रोत्साहन देने पर भी चर्चा हो रही है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, रिफाइनर्स की ओर से ज्वेलर्स को करीब 0.75 से 1 फीसदी तक इंसेंटिव दिए जाने का प्रस्ताव हो सकता है।

इससे ज्वेलर्स ग्राहकों को योजना के बारे में जानकारी देने और अधिक से अधिक सोना जमा कराने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं। वहीं, रिफाइनर्स को भी अधिक मात्रा में सोना उपलब्ध होने का फायदा मिलेगा।

कब तक शुरू हो सकती है योजना?

इस प्रस्तावित योजना पर सरकार कुछ समय से विचार कर रही है। पहले इसके 15 अगस्त के आसपास आने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन योजना के अंतिम नियमों को लेकर चर्चा के कारण इसमें देरी हुई है। उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, योजना अगस्त के अंत या अक्टूबर तक, त्योहारी सीजन के आसपास पेश की जा सकती है।

हालांकि, अभी सोने की शुद्धता की जांच, किसी विवाद की स्थिति में जिम्मेदारी, टैक्स नियम और सिक्कों व गोल्ड बार को शामिल करने जैसे कई मुद्दों पर अंतिम फैसला होना बाकी है।

सरकार के सामने बड़ी चुनौती

नई योजना का उद्देश्य घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को अर्थव्यवस्था में लाना है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। यदि योजना में नए सोने के सिक्के या गोल्ड बार जमा करने पर भी ब्याज मिलता है तो लोग केवल ब्याज कमाने के लिए नया सोना खरीदकर उसे योजना में जमा कर सकते हैं। इससे सोने के आयात को कम करने का सरकार का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

इसलिए योजना की अंतिम शर्तें और नियम सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आम लोगों को इसका कितना फायदा मिलेगा और सरकार इसे किस तरह लागू करती है।

महत्वपूर्ण: अभी यह एक प्रस्तावित योजना है। सरकार की ओर से इसके ब्याज, पात्रता, अवधि और अंतिम नियमों की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।