बंगाल में वोटर लिस्ट विवाद: पूर्व सांसद तरुण मंडल का नाम डिलीट, ‘एक्सक्लूजन लिस्ट’ से मचा सियासी बवाल
बंगाल में वोटर लिस्ट विवाद: पूर्व सांसद तरुण मंडल का नाम डिलीट, ‘एक्सक्लूजन लिस्ट’ से मचा सियासी बवाल
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब जयनगर लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद Tarun Mondal का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया। शुक्रवार को जारी ‘एक्सक्लूजन लिस्ट’ (Deletion List) में उनका नाम शामिल होने से राजनीतिक गलियारों में सवालों की बौछार शुरू हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, डॉ. तरुण मंडल दक्षिण हावड़ा विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं और उनका नाम बूथ संख्या 279 में दर्ज था। लेकिन हालिया संशोधन प्रक्रिया के दौरान उनका नाम सूची से हटा दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि उनकी पत्नी महुआ मंडल का नाम जांच के बाद वैध मतदाता के रूप में बरकरार रखा गया है, जिससे यह मामला और भी चर्चा में आ गया है।
क्या है मामला?
मतदाता सूची के इस संशोधन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर किन आधारों पर एक ही परिवार के दो सदस्यों में से एक का नाम हटाया गया और दूसरे का बरकरार रखा गया। चुनावी माहौल के बीच इस तरह की घटनाएं राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जा रही हैं।
2009 में दर्ज की थी बड़ी जीत
डॉ. तरुण मंडल ने 2009 में Socialist Unity Centre of India (Communist) (SUCI-C) के उम्मीदवार के रूप में जयनगर लोकसभा सीट से जीत हासिल की थी। उस समय उन्हें कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। उन्होंने Nimai Barman को हराकर वाम मोर्चे के लंबे समय से चले आ रहे प्रभाव को चुनौती दी थी।
चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी गर्मी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान प्रस्तावित है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। राज्य की 294 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में मुकाबला मुख्य रूप से All India Trinamool Congress (TMC) और Bharatiya Janata Party (BJP) के बीच माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री Mamata Banerjee जहां चौथे कार्यकाल के लिए चुनावी मैदान में हैं, वहीं भाजपा नेता Suvendu Adhikari “सोनार बांग्ला” के नारे के साथ सत्ता परिवर्तन की कोशिश में जुटे हैं।
मतदाता सूची से पूर्व सांसद का नाम हटना सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनावी माहौल में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब राज्य में मतदान की तारीखें नजदीक हैं।