Kolkata News: बकरीद से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- गाय की कुर्बानी इस्लाम में अनिवार्य नहीं

बिहार के औरंगाबाद से अपहृत चार वर्षीय आद्विक को गया से सकुशल बरामद किया गया। जांच के दौरान 4 साल पहले चोरी हुआ बच्चा शिवम भी पुलिस ने बरामद कर लिया।

 
प्रीति सिंह की रिपोर्ट 

कोलकाता। बकरीद (ईद-उल-अजहा) से पहले पशु कुर्बानी को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि “गाय की कुर्बानी त्योहार का अनिवार्य हिस्सा नहीं है” और पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से जारी अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल (Sujoy Paul) की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अधिसूचना में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया जाए कि इस्लाम में गाय की कुर्बानी धार्मिक आवश्यकता नहीं मानी गई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चर्चित “हनीफ कुरैशी बनाम बिहार राज्य” फैसले का भी हवाला दिया।

सरकार की गाइडलाइन को हाईकोर्ट की मंजूरी

दरअसल पश्चिम बंगाल सरकार ने बकरीद से पहले पशु वध को लेकर नई गाइडलाइन जारी की थी। इसमें बिना स्वास्थ्य प्रमाणपत्र वाले पशुओं की कुर्बानी पर रोक, सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध प्रतिबंधित करने और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान शामिल है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि बकरीद के मौके पर पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के तहत छूट दी जाए। हालांकि हाईकोर्ट ने सरकार की अधिसूचना को सही ठहराते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर रोक

अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक और खुले स्थानों पर किसी भी प्रकार का पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। कुर्बानी केवल निर्धारित और सुरक्षित स्थानों पर ही की जा सकेगी।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले पशु कुर्बानी को लेकर प्रशासनिक सख्ती और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।