ईडी की बड़ी कार्रवाई, पूर्व डीसीपी संतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ पहली पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल

 
प्रीति सिंह की रिपोर्ट

 

कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत पूर्व पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) संतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ पहली पूरक अभियोजन शिकायत कोलकाता के सिटी सेशंस कोर्ट में दाखिल की है। यह मामला बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और अन्य के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है। संतनु सिन्हा बिस्वास को 10 जुलाई 2026 को पीएमएलए की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं।

 

ईडी के अनुसार, बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और उसके सहयोगियों के खिलाफ कोलकाता पुलिस द्वारा हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और शस्त्र अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में कई एफआईआर दर्ज हैं। जांच में सामने आया कि यह गिरोह पश्चिम बंगाल में संगठित आपराधिक गतिविधियों और सिंडिकेट संचालन के जरिए अवैध धन अर्जित करता था।

जांच एजेंसी का दावा है कि संतनु सिन्हा बिस्वास ने जय एस. कामदार को प्रभावशाली बिचौलिए के रूप में इस्तेमाल किया, जिसने पुलिस विभाग में तबादले और पोस्टिंग से जुड़े मामलों में कथित रूप से मदद की। ईडी के मुताबिक, इसके बदले संतनु सिन्हा बिस्वास और उनके परिवार को महंगे उपहार और अन्य आर्थिक लाभ मिले। जांच में यह भी आरोप है कि उन्होंने पुलिस जांच को प्रभावित करने और कानून प्रवर्तन के मामलों में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि संतनु सिन्हा बिस्वास ने कथित अपराध से अर्जित धन का उपयोग मुर्शिदाबाद के कांडी स्थित संपत्ति के निर्माण और मरम्मत में किया। इसके अलावा कोलकाता और आसपास कई आवासीय संपत्तियां अन्य व्यक्तियों और कंपनियों के नाम पर खरीदी गईं, जिनका वास्तविक लाभ संतनु सिन्हा बिस्वास और उनके परिवार को मिला। जांच एजेंसी के अनुसार, उन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपराध से अर्जित कम से कम 28.89 करोड़ रुपये का लाभ प्राप्त किया।

ईडी ने इससे पहले 1 अप्रैल, 19 अप्रैल और 26 अप्रैल 2026 को कोलकाता और आसपास कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान संतनु सिन्हा बिस्वास, बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और जय एस. कामदार के परिसरों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। 19 मई 2026 को जय एस. कामदार को भी गिरफ्तार किया गया था, जबकि 17 जून 2025 को उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की जा चुकी है।

ईडी ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है।