पश्चिम बंगाल में BJP का बड़ा एक्शन, जबरन वसूली और अनुशासनहीनता के आरोप में 22 पदाधिकारी निलंबित

 पश्चिम बंगाल में भाजपा ने जबरन वसूली, अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में 22 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया। 250 से अधिक नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।
 

कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल में संगठन के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए बड़ी कार्रवाई करते हुए 22 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

इन नेताओं पर जबरन वसूली, अनुशासनहीनता, पार्टी विरोधी गतिविधियों और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से कथित संबंध रखने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। निलंबित नेताओं में कई मंडल अध्यक्ष भी शामिल बताए जा रहे हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा सरकार बनने के बाद यह संगठनात्मक स्तर पर अब तक की सबसे बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई मानी जा रही है।

250 से ज्यादा नेताओं को मिला था कारण बताओ नोटिस

भाजपा नेतृत्व को पिछले कुछ महीनों में राज्य के विभिन्न जिलों, खासकर कोलकाता और आसपास के इलाकों से कई शिकायतें मिली थीं।

इसके बाद 250 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

जांच के दौरान लगभग 80 पदाधिकारियों के जवाब संतोषजनक पाए गए, जबकि कई नेता समय पर जवाब नहीं दे सके या उनके स्पष्टीकरण से अनुशासन समिति संतुष्ट नहीं हुई। इसके बाद 22 नेताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

जबरन वसूली और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप

पार्टी सूत्रों के मुताबिक निलंबित नेताओं पर जबरन वसूली, विपक्षी दलों के कार्यालयों पर कब्जा करने की कोशिश, विरोधी दल के नेताओं से कथित संपर्क रखने और संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं।

भाजपा का कहना है कि संगठन में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या भ्रष्ट आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष ने पहले ही दी थी चेतावनी

भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कुछ सप्ताह पहले ही पार्टी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि जबरन वसूली जैसी संस्कृति को तत्काल छोड़ना होगा। उन्होंने कहा था कि यदि निर्धारित समय में सुधार नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राज्य के वरिष्ठ नेताओं दिलीप घोष, अर्जुन सिंह और अग्निमित्रा पॉल ने भी कई बार स्पष्ट किया था कि पार्टी किसी भी ऐसे नेता का बचाव नहीं करेगी जिस पर जबरन वसूली या भ्रष्टाचार के आरोप साबित होंगे।

संगठन में अनुशासन को प्राथमिकता

भाजपा का कहना है कि संगठन को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है। पार्टी नेतृत्व ने साफ किया है कि भविष्य में भी शिकायत मिलने पर इसी तरह की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।