बंगाल चुनाव 2026: ‘DA’ बना सम्मान की लड़ाई, BJP ने बनाया सबसे बड़ा चुनावी हथियार
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार सियासत का केंद्र सिर्फ विकास और योजनाएं नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) बन गया है। यह मुद्दा अब वेतन से आगे बढ़कर सम्मान और अधिकार की लड़ाई का रूप ले चुका है, जिसे Bharatiya Janata Party ने अपने प्रमुख चुनावी एजेंडे में शामिल कर लिया है।
दरअसल, राज्य और केंद्र के कर्मचारियों के DA में भारी अंतर इस विवाद की जड़ है। वर्तमान में पश्चिम बंगाल के कर्मचारियों को लगभग 22% DA मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को करीब 55% तक महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। इसी असमानता को लेकर लंबे समय से कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं।
मामले को और मजबूती तब मिली जब Supreme Court of India ने फरवरी 2026 में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि DA कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है और राज्य सरकार को बकाया का 25% तत्काल भुगतान करना होगा। इस फैसले के बाद यह मुद्दा पूरी तरह राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया।
इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने बड़ा चुनावी वादा करते हुए कहा है कि अगर बंगाल में BJP की सरकार बनती है तो 45 दिनों के भीतर 7वां वेतन आयोग लागू कर दिया जाएगा और कर्मचारियों का बकाया DA चुकाया जाएगा। माना जा रहा है कि 5 अप्रैल को पार्टी के घोषणापत्र में इस पर और बड़ा ऐलान हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP इस मुद्दे के जरिए सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों, पेंशनरों और मध्यम वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। यह वर्ग न केवल खुद वोट करता है, बल्कि समाज में जनमत को भी प्रभावित करता है।
वहीं All India Trinamool Congress (TMC) के लिए यह मुद्दा चुनौती बनता जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि जब कर्मचारी सड़कों पर उतरे तो सरकार ने अनदेखी की, और अब चुनाव नजदीक आते ही राहत की बातें की जा रही हैं।
हालांकि, इस वादे के साथ BJP के सामने जोखिम भी कम नहीं है। राज्य सरकार पहले ही अदालत में अपनी वित्तीय स्थिति को कमजोर बता चुकी है। ऐसे में अगर सत्ता में आने के बाद 45 दिनों में यह वादा पूरा नहीं हुआ, तो यही मुद्दा भाजपा के लिए उल्टा पड़ सकता है।
निष्कर्ष:
बंगाल का यह चुनाव अब सिर्फ राजनीतिक दलों की लड़ाई नहीं, बल्कि कर्मचारियों के अधिकार, सम्मान और सरकार की विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुका है। DA का मुद्दा यह तय कर सकता है कि राज्य का कर्मचारी वर्ग किसके साथ खड़ा होगा।