बंगाल चुनाव 2026: कांग्रेस का ‘सोलो गेम’, 284 सीटों पर दांव-क्या बिगड़ेगा ममता या BJP का समीकरण?
बंगाल चुनाव 2026: कांग्रेस का ‘सोलो गेम’, 284 सीटों पर दांव क्या बिगड़ेगा ममता या BJP का समीकरण?
पश्चिम बंगाल। Adhir Ranjan Chowdhury से लेकर Mausam Benazir Noor तक, कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपने सभी बड़े नेताओं को मैदान में उतार दिया है। पार्टी ने कुल 294 में से 284 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर यह साफ संकेत दे दिया है कि इस बार वह गठबंधन नहीं, बल्कि अपने दम पर सियासी लड़ाई लड़ने के मूड में है।
करीब तीन दशक बाद विधानसभा चुनाव में वापसी कर रहे अधीर रंजन चौधरी को उनके मजबूत गढ़ बहरामपुर से टिकट दिया गया है। वहीं, हाल ही में पार्टी में लौटीं मौसम नूर को मालतीपुर सीट से उतारकर कांग्रेस ने मालदा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है।
कोलकाता की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर सीट पर कांग्रेस ने प्रदीप प्रसाद को मैदान में उतारा है, जहां मुकाबला सीधे Mamata Banerjee और Suvendu Adhikari जैसे दिग्गजों से है।
सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस
कांग्रेस ने इस बार टिकट वितरण में सोशल इंजीनियरिंग का बड़ा कार्ड खेला है।
- 68 दलित उम्मीदवार
- 64 मुस्लिम प्रत्याशी
- 16 अनुसूचित जनजाति
- 42 महिला उम्मीदवार
इस रणनीति से कांग्रेस ने साफ तौर पर अल्पसंख्यक और वंचित वर्गों को साधने की कोशिश की है, जो अब तक तृणमूल कांग्रेस का मजबूत वोट बैंक माने जाते रहे हैं।
मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी ने खास रणनीति के तहत उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे इन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है।
त्रिकोणीय मुकाबले की तैयारी
Indian National Congress की रणनीति इस बार साफ है- राज्य में सीधे मुकाबले को त्रिकोणीय बनाना।
अब तक बंगाल की राजनीति All India Trinamool Congress और Bharatiya Janata Party के बीच सिमटती दिख रही थी, लेकिन कांग्रेस की एंट्री से समीकरण बदल सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है, जिससे तृणमूल को नुकसान हो सकता है। वहीं, वोटों का बंटवारा भाजपा को भी अप्रत्यक्ष फायदा पहुंचा सकता है।
2021 की हार के बाद वापसी की कोशिश
2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी और भाजपा 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बनी थी।
इस बार कांग्रेस का लक्ष्य सिर्फ सीट जीतना नहीं, बल्कि अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाना और यह साबित करना है कि वह अभी भी बंगाल की राजनीति में प्रासंगिक है।
क्या बनेगी कांग्रेस ‘किंगमेकर’?
बंगाल की चुनावी जंग में कांग्रेस की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है। अगर पार्टी सीमित सीटें भी जीतती है, तो वह न सिर्फ मुकाबले को दिलचस्प बनाएगी बल्कि सत्ता के समीकरण भी बदल सकती है।
अब देखना होगा कि कांग्रेस का यह दांव Mamata Banerjee के लिए चुनौती बनता है या Bharatiya Janata Party के लिए मुश्किल खड़ी करता है।